रामनगरिया मेले पर गंगा का दबाव : जलस्तर बढ़ने से कल्पवासियों के डेरों तक पहुंचा पानी, बोरियों से की जा रही अस्थायी घेराबंदी
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संवाद 24 संवादाता। शमशाबाद क्षेत्र के ढाई घाट पर गंगा तट पर लगने वाले ऐतिहासिक रामनगरिया मेला की तैयारियों के बीच गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से प्रशासन और कल्पवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। गंगा का पानी पहाड़ी के नीचे बसे कल्पवासियों के आशियानों के बेहद करीब पहुंच गया है, जबकि कुछ स्थानों पर जलभराव भी शुरू हो गया है।
स्थिति को संभालने के लिए जिला पंचायत शाहजहांपुर द्वारा मेला क्षेत्र में बोरियां लगवाकर पानी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि श्रद्धालुओं और कल्पवासियों का कहना है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई, तो पानी सीधे तंबुओं और डेरों में प्रवेश कर सकता है, जिससे भारी अव्यवस्था उत्पन्न होने की आशंका है।
कल्पवासियों का आरोप है कि मेला क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं अब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। बिजली, पेयजल और आवागमन के रास्तों को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं, जबकि गंगा के बढ़ते जलस्तर ने हालात और गंभीर कर दिए हैं।
कुछ दिन पूर्व अपर पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद ने क्षेत्राधिकारी कायमगंज के साथ ढाई घाट का निरीक्षण कर मेला व्यवस्थाओं को समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियों की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
करीब एक माह तक चलने वाले इस सुप्रसिद्ध मेले में फर्रुखाबाद सहित कन्नौज, कानपुर, औरैया, इटावा, आगरा, एटा, मथुरा और अयोध्या जैसे कई जनपदों से श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी पहुंचते हैं। साधु-संत गंगा स्नान, सूर्योपासना और कल्पवास के लिए डेरा डालते हैं, वहीं व्यापारी भी दुकानें सजाने लगे हैं।
वर्तमान में मेला क्षेत्र में साधु-संतों और कल्पवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तंबुओं की कतारें दिखाई देने लगी हैं, वहीं प्रशासन द्वारा स्नान स्थलों के पास बैरिकेडिंग, सुरक्षा, बिजली और पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने का कार्य जारी बताया जा रहा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यदि समय रहते स्थायी और प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए, तो रामनगरिया मेले की तैयारियों पर गंभीर असर पड़ सकता






