संस्कारों से ही बनता है चरित्र, व्यवहार करता है उनका प्रकटीकरण, सतीश महाना
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि व्यक्ति का व्यवहार ही उसके संस्कारों का सजीव प्रतिबिंब होता है। यदि समाज को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले बच्चों के संस्कारों को मजबूत करना होगा। वह जनपद में आयोजित निजी कार्यक्रमों में शामिल होने के दौरान फतेहगढ़ स्थित एक विद्यालय के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में धैर्यपूर्वक सुनने और समझने की क्षमता में कमी आई है, जबकि यही गुण व्यक्तित्व निर्माण की नींव होते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और उसे सीखने में पूरा जीवन लग सकता है, लेकिन बचपन में दिए गए संस्कार जीवन भर साथ निभाते हैं। तकनीक किसी की प्रतीक्षा नहीं करती, पर संस्कार व्यक्ति को हर परिस्थिति में सही मार्ग दिखाते हैं।
सतीश महाना ने कहा कि जीवन में सेवा, संस्कार और समर्पण का भाव होना चाहिए। यही मूल्य समाज को दिशा देते हैं। उन्होंने फर्रुखाबाद से अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस जनपद से उनका विशेष लगाव रहा है और वे यहां के सामाजिक व राजनीतिक परिवेश से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी को अपना दत्तक पिता बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप स्मरण किया तथा मुकेश राजपूत के कार्यों की सराहना की। उन्होंने लोकतंत्र की भावना पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई राजा नहीं होता, जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि केवल पांच वर्षों के लिए जनता की सेवा करने का दायित्व निभाता है।
इस अवसर पर सांसद मुकेश राजपूत, विधायक सुशील शाक्य, मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, डॉ. सुरभि, नागेंद्र सिंह राठौर, दुर्वाषा आश्रम के महंत ईश्वर दास महाराज, औरैया विधायक राहुल बच्चा सोनकर, वीरेंद्र सिंह राठौर तथा जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित






