मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा, सुधांशु–अर्चना द्विवेदी ने केजीएमयू में किया देहदान का संकल्प
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। समाज में सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए सुधांशु दत्त द्विवेदी एवं उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी ने मृत्यु के बाद भी मानव कल्याण का मार्ग चुना है। दोनों ने अगस्त 2022 में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में देहदान का विधिवत संकल्प पत्र भरकर चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने का निर्णय लिया था। यह प्रेरक पहल इन दिनों पूरे जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि सुधांशु दत्त द्विवेदी, प्रदेश के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे तथा सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के चचेरे भाई हैं। उन्होंने बताया कि देहदान का निर्णय उन्होंने काफी पहले ले लिया था और इसे जीवन का एक नैतिक दायित्व मानते हैं। उनके अनुसार, मृत्यु के बाद अधिकांश अंग उपयोगी नहीं रह जाते, जबकि देहदान के माध्यम से पूरा शरीर चिकित्सा शिक्षा में प्रयोग होकर भावी डॉक्टरों के प्रशिक्षण में सहायक बनता है।
सुधांशु द्विवेदी ने कहा कि मेडिकल छात्र मानव शरीर की संरचना, जटिलताओं और रोगों का व्यावहारिक अध्ययन देहदान से प्राप्त शरीरों के माध्यम से करते हैं, जिससे कुशल और संवेदनशील चिकित्सक तैयार होते हैं। यही कारण है कि देहदान न केवल विज्ञान, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य भविष्य के लिए एक अमूल्य योगदान है।
पत्नी अर्चना द्विवेदी के साथ लिया गया यह साझा संकल्प सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया है। उनका यह कदम न केवल मानवता की सेवा का संदेश देता है, बल्कि अन्य लोगों को भी देहदान जैसे महान कार्य के लिए प्रेरित करने की क्षमता रखता है। संवाद24 इस प्रेरक पहल को समाज के लिए अनुकरणीय मानता






