फर्रुखाबाद: घर में घुसकर हमला करने के मामले में मां और दो बेटों को सजा, अदालत ने 3 और 5 साल की कैद के साथ 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया
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फर्रुखाबाद में 2005 में हुए घर में घुसकर हमले और जान से मारने की धमकी के मामले में अदालत ने पीड़ित पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एक महिला और उसके दो बेटों को दोषी करार दिया है। एडीजे दीपेन्द्र कुमार सिंह की अदालत ने महिला राजवती को तीन साल जबकि उसके दोनों बेटों—कौशल उर्फ कैलाश और अवलोक उर्फ निश्चल—को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई। तीनों पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
2005 में हुई थी घटना
यह केस कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के नरसिंहपुर गांव का है। शिकायतकर्ता सौरभ कुमार द्विवेदी ने बताया था कि 2 नवंबर 2005 की सुबह उनके पिता देवेंद्र कुमार द्विवेदी घर पर बैठे थे। तभी गांव के सुभाष चंद्र, उनकी पत्नी राजवती और उनके दोनों बेटे हथियारों के साथ घर में घुस आए।
आरोप है कि चारों के हाथों में कुल्हाड़ी, टकोरा, लाठी और हंसिया जैसे हथियार थे। उन्होंने देवेंद्र द्विवेदी पर हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाई। जब राधेश्याम (पीड़ित के चचेरे बाबा) बीच-बचाव करने आए तो उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत
पुलिस जांच के बाद चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी सुभाष चंद्र का निधन हो गया। कोर्ट ने बाकी तीन आरोपियों—कौशल उर्फ कैलाश, अवलोक उर्फ निश्चल और राजवती—को दोषी ठहराया।
दोनों बेटों को पांच वर्ष कैद और महिला को तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने कहा कि गंभीर हमला और घर में घुसकर मारपीट जैसे अपराध समाज में भय पैदा करते हैं, इसलिए कठोर सजा जरूरी है।






