आलू पर सियासत गरम: फर्रुखाबाद से लखनऊ तक किसानों की हुंकार
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फर्रुखाबाद में आलू किसानों ने मंगलवार को अपनी उपज के उचित दाम और सरकारी संरक्षण की मांग को लेकर ‘आलू किसान बचाओ यात्रा’ निकाली। सातनपुर मंडी से शुरू हुई यह यात्रा लखनऊ स्थित राजभवन तक जाएगी, जहां किसान राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराएंगे। किसानों का कहना है कि मौजूदा समय में आलू की कीमतें इतनी गिर गई हैं कि उन्हें लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
सातनपुर मंडी से उठी आवाज, सरकार तक पहुंचेगी मांग
किसानों और आलू कारोबारियों ने सातनपुर मंडी में बैठक कर इस यात्रा की रणनीति बनाई थी। किसान नेताओं के अनुसार यात्रा फर्रुखाबाद से कमालगंज, कन्नौज, बिल्हौर, कानपुर और उन्नाव होते हुए लखनऊ पहुंचेगी। इस आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता अशोक कटियार कर रहे हैं, जबकि इसमें कई किसान संगठनों, आढ़ती संघ और आलू व्यापारियों का समर्थन भी शामिल है।
“लागत तक नहीं निकल रही”, किसानों का बड़ा आरोप
किसान नेताओं सुधीर कुमार शुक्ल और अशोक कटियार ने कहा कि आलू की खेती में किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार में उन्हें उसकी भरपाई तक नहीं मिल रही। किसानों का दावा है कि आलू की कीमतें कई बार इतनी नीचे चली जाती हैं कि भंडारण, परिवहन और मजदूरी का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गेहूं और धान जैसी फसलों पर ध्यान देती है, लेकिन आलू किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
MSP से लेकर मिड-डे मील तक, किसानों की ये हैं प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करना, आलू पर मंडी शुल्क समाप्त करना, भंडारण शुल्क में राहत देना और आलू के निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा किसानों ने मांग की है कि आलू को राशन दुकानों और मिड-डे मील योजना में शामिल किया जाए, ताकि खपत बढ़े और किसानों को बेहतर दाम मिल सके। किसानों ने क्षेत्र में आलू आधारित प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने की भी मांग की है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और बाजार दोनों को मजबूती मिल सके।
सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो तेज होगा आंदोलन
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि आलू उत्पादक किसान लगातार घाटे में जा रहे हैं और कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो आने वाले दिनों में प्रदेश के कई जिलों में बड़ा किसान आंदोलन देखने को मिल सकता है।






