आलू के दाम पर भड़की भाकियू, सरकार पर किसानों की आय को लेकर गुमराह करने का आरोप

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन ने फर्रुखाबाद पहुंचकर सरकार पर किसानों की आय को लेकर देश और दुनिया को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ गई है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। जादौन ने कहा कि किसान आज भी अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

फर्रुखाबाद में जिलाध्यक्ष अजय कटियार के कार्यालय पर आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि जिले में आलू का एक पैकेट मात्र 100 रुपये में बिक रहा है। इससे किसान बेहद परेशान हैं, क्योंकि लागत बढ़ने के बावजूद उपज का मूल्य लगातार गिर रहा है। उनका आरोप था कि सरकार केवल आंकड़ों और एजेंडे के आधार पर किसानों की स्थिति बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि किसानों की वास्तविक आय में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

फर्रुखाबाद में बोले राजवीर सिंह जादौन: किसान की कमाई नहीं बढ़ी, सिर्फ आंकड़ों का खेल चल रहा

राजवीर सिंह जादौन ने संसद के प्रश्नकाल में कृषि मंत्री द्वारा किसानों की आय आठ गुना बढ़ने के दावे को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की आमदनी वास्तव में इतनी बढ़ी होती, तो देशभर के किसान आज भी लागत और दाम के बीच फंसे नहीं होते। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के किसानों की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को जमीनी सच्चाई देखने की जरूरत है।

उन्होंने फर्रुखाबाद और जालौन के आलू के दामों का उदाहरण देते हुए कहा कि फर्रुखाबाद में किसान का आलू 2 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि जालौन में वही आलू 20 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। उनका कहना था कि किसानों पर ऐसे नियम लागू कर दिए गए हैं, जिनके कारण अधिक उत्पादन होने पर फसल का मूल्य घट जाता है, जबकि व्यापारियों को कई तरह की छूट मिलती है।

राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि किसान अब सब कुछ समझता है और सरकार की नीतियों को लेकर जागरूक हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि फर्रुखाबाद की सातनपुर मंडी एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडियों में गिनी जाती है और सरकार को इस पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मंडी व्यापारियों से नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत से बनी है। हाल के दिनों में मंडी में आलू के दाम 250 रुपये से 750 रुपये प्रति कुंतल तक दर्ज किए गए हैं, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि फर्रुखाबाद में बड़े आलू प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएं, ताकि किसानों को बेहतर बाजार मिल सके और फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो। जादौन ने कहा कि यदि सरकार ने आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

बैठक के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और उन्होंने भी आलू के गिरते दाम, बढ़ती लागत और बाजार व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। हाल के महीनों में कन्नौज और फर्रुखाबाद के कोल्ड स्टोरेज से आलू की निकासी भी काफी कम रही है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ी है।

Anuj Singh
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