बेटे के खाते में पैसे, नकद भी लिया… फर्रुखाबाद में दरोगा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
Share your love

ग्राम समाज की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के नाम पर कथित धन उगाही का मामला सामने आने के बाद फर्रुखाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मोहम्मदाबाद कोतवाली में तैनात हल्का प्रभारी सुरेश चाहर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई निसाई गांव की ग्राम प्रधान गीता देवी की शिकायत के बाद हुई, जिन्होंने कानपुर जोन के एडीजी से मिलकर आरोपों के समर्थन में ऑनलाइन ट्रांसफर के स्क्रीनशॉट भी सौंपे।
शिकायत के मुताबिक, निसाई गांव में ग्राम सभा की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर प्रधान ने पहले भी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी। प्रधान का आरोप है कि कार्रवाई कराने के नाम पर उन्हें संबंधित पुलिसकर्मी से संपर्क करने को कहा गया, जिसके बाद उनसे रकम की मांग की गई। आरोप है कि इसी सिलसिले में दरोगा सुरेश चाहर ने अपने बेटे पंकज चाहर के बैंक खाते में कई किस्तों में धनराशि ट्रांसफर कराई।
जमीन कब्जा हटाने के नाम पर 1.75 लाख की वसूली! फर्रुखाबाद में दरोगा पर भ्रष्टाचार का केस
मामले में ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया है कि कुल 1.75 लाख रुपये लिए गए, जिनमें से 75 हजार रुपये नकद दिए गए, जबकि शेष राशि ऑनलाइन भेजी गई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान ने एडीजी आलोक कुमार सिंह को सौंपे गए प्रार्थना पत्र के साथ उन ट्रांजैक्शनों के स्क्रीनशॉट भी दिए, जिनमें रकम कई बार में ट्रांसफर होने की बात कही गई है।
. ग्राम समाज की जमीन छुड़ाने की कीमत? प्रधान की शिकायत पर दरोगा सुरेश चाहर पर मुकदमा
रिपोर्टों के अनुसार, ग्राम प्रधान ने अपनी शिकायत में कहा कि ग्राम सभा की जमीन पर दबंगों के कब्जे की शिकायत उन्होंने 12 जनवरी 2025 और 14 मई 2025 को भी अधिकारियों से की थी। उनका आरोप है कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, और बाद में जमीन खाली कराने के नाम पर धनराशि मांगी गई।
फर्रुखाबाद पुलिस की ओर से भी शुरुआती जांच में आरोपों को गंभीर माना गया है। अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सुरेश चाहर के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर विवेचनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
प्रधान ने एडीजी को दिए ट्रांसफर के स्क्रीनशॉट, फिर फंसे दरोगा सुरेश चाहर
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आरोप किसी निजी विवाद से नहीं, बल्कि ग्राम समाज की जमीन को कब्जामुक्त कराने जैसी प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है। ऐसे में अब जांच का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि कथित वसूली किस परिस्थिति में हुई, धनराशि का प्रवाह किस खाते में गया, और क्या इस पूरे प्रकरण में अन्य स्तरों पर भी जिम्मेदारी तय होगी। अभी तक पुलिस की ओर से सार्वजनिक रूप से इस मामले में किसी गिरफ्तारी या निलंबन की पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन दर्ज मुकदमे ने स्थानीय स्तर पर हलचल जरूर बढ़ा दी है।






