संत रामपाल के नाम से चल रहे कथित आश्रमों की जांच की मांग तेज
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शहर क्षेत्र के मोहल्ला नई बस्ती स्थित एक प्रतिष्ठान पर आयोजित प्रेसवार्ता में संत रामपाल के कुछ अनुयायियों ने उनके नाम पर देश और विदेश में कथित रूप से आश्रम संचालित कर धन उगाही किए जाने का आरोप लगाया। प्रेसवार्ता के दौरान कानपुर निवासी रामचंद्र यादव ने दावा किया कि संत रामपाल की अनुमति के बिना कुछ लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर आश्रमों का संचालन कर रहे हैं और श्रद्धालुओं से मोटी रकम वसूल रहे हैं।
रामपाल के नाम पर ‘फर्जी आश्रम’ चलाने का आरोप, अनुयायियों ने सरकार से कार्रवाई की मांग की
रामचंद्र यादव ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और ऐसे कथित संस्थानों पर रोक लगाना जरूरी है, जो संत रामपाल के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका आरोप था कि रामपाल के परिवार से जुड़े कुछ लोग भी इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रेसवार्ता के दौरान कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया।
संत रामपाल के नाम से देश-विदेश में धन उगाही का दावा, अनुयायियों ने उठाई जांच की मांग
प्रेसवार्ता में मौजूद अनुयायियों ने सरकार से मांग की कि संत रामपाल के नाम से चल रहे कथित फर्जी आश्रमों और उनसे जुड़े आर्थिक लेनदेन की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि इससे वास्तविक अनुयायियों के बीच भ्रम की स्थिति खत्म होगी और नाम के दुरुपयोग पर रोक लग सकेगी। इस दौरान महेंद्र दास और राम शरण दास भी मौजूद रहे।
रामपाल समर्थकों का आरोप: बिना अनुमति चल रहे कथित आश्रमों पर लगे रोक
संत रामपाल का मामला पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। वर्ष 2018 में हरियाणा की एक अदालत ने 2014 के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम प्रकरण में रामपाल और उनके कुछ अनुयायियों को हत्या सहित अन्य आरोपों में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। बाद की रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में उनकी सजा निलंबित करते हुए सशर्त राहत दी थी। ऐसे में उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं, इसलिए स्थानीय प्रेसवार्ता में किए गए दावों को आधिकारिक अभिलेखों से परखना अहम माना जा रहा है।
‘रामपाल के नाम पर वसूली’ का दावा, प्रेसवार्ता में अनुयायियों ने की सख्त कार्रवाई की अपील
फिलहाल, प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन इन दावों की जांच कर कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।






