एक हफ्ते पहले बनी सड़क पर बवाल: हाथ लगाते ही उखड़ा डामर, जांच के लिए अफसर मौके पर

जिले के अमृतपुर क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बन रही नई सड़क की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजपुर से गुडेरा होते हुए पिथनापुर कोला सोता संपर्क मार्ग पर निर्माणाधीन सड़क के हाथ से उखड़ने का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण पिछले लगभग एक सप्ताह से चल रहा बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा। सामने आए वीडियो में डामर की परत कमजोर दिखाई देने और गिट्टियां सतह पर साफ नजर आने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सड़क की सतह समतल नहीं है, जिससे आवाजाही के दौरान झटके अधिक महसूस हो रहे हैं।

पिथनापुर निवासी अतुल दुबे ने निर्माण कार्य को बेहद घटिया बताते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क में पर्याप्त निर्माण सामग्री नहीं डाली गई, बल्कि केवल गिट्टियां मिलाकर करीब दो इंच की परत बिछा दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि शुरुआती अवस्था में ही सड़क की सतह हाथ से उखड़ रही है, तो इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं।

एक अन्य ग्रामीण शिवमंगल सिंह ने भी सड़क निर्माण में समतलीकरण और तकनीकी गुणवत्ता की कमी का मुद्दा उठाया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई है। गुरुवार से जुड़े बताए जा रहे वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

मामले पर खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) अशोक कुमार ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आ गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) अंकित कुमार और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) राकेश यादव को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। विभागीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता और मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जा रहा है।

अधिशासी अभियंता ने ग्रामीणों के आरोपों पर प्रारंभिक सफाई भी दी है। उनके मुताबिक, इस सड़क पर कुटाई की अलग परत नहीं है और इसमें केवल 2 सेंटीमीटर की पीसी (प्रीमिक्स कारपेट) की जानी होती है। उनका कहना है कि सड़क अभी ताजी बनी है, इसलिए ऊपरी परत हाथ से हटती हुई दिखाई दी। हालांकि, स्थानीय लोगों का तर्क है कि नई सड़क की मजबूती शुरुआत से ही स्पष्ट दिखनी चाहिए।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में विभागीय जांच रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। यदि जांच में निर्माण मानकों में कमी, घटिया सामग्री या तकनीकी लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर वास्तव में जवाबदेही तय होती है।

Anuj Singh
Anuj Singh

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