शव के पास मिला आधार-पैन और मोबाइल, नंबर ट्रेस करते ही सामने आया चौंकाने वाला सच
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हाथरस रेलवे स्टेशन परिसर में एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही जीआरपी मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। तलाशी के दौरान मृतक के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसके आधार पर पुलिस ने पहचान की प्रक्रिया शुरू की।
मोबाइल नंबर ने खोला चौंकाने वाला राज
प्रारंभिक जांच में जब मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया तो उसकी पहचान औरैया जिले के किशनी निवासी रामवीर के रूप में सामने आई। पुलिस टीम इस सुराग के आधार पर आगे बढ़ी और मामले की पुष्टि के लिए संबंधित स्थानों पर जांच शुरू की।
जिंदा मिला ‘मृतक’—परिवार ने बताया सच
मामले ने उस वक्त चौंकाने वाला मोड़ ले लिया जब पुलिस टीम रामवीर के घर पहुंची। परिजनों ने बताया कि रामवीर जीवित है और गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे इलाज के लिए सैफई भेजा गया है, जहां उसका उपचार जारी है। इस खुलासे के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि जब व्यक्ति जिंदा है, तो उसका मोबाइल शव के पास कैसे पहुंचा।
फर्रुखाबाद जीआरपी ने भी की जांच, लेकिन नहीं मिला सुराग
फर्रुखाबाद जीआरपी की टीम ने भी मामले की तह तक जाने के लिए लोहिया अस्पताल सहित अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में झुलसे मरीजों की जानकारी जुटाई, लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। जीआरपी थाना अध्यक्ष शेर सिंह के अनुसार, मामला बेहद उलझा हुआ है और कई एंगल से जांच की जा रही है।
आपराधिक इतिहास और बढ़ी रहस्य की परतें
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रामवीर सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ मुरादाबाद में पहले कार्रवाई हो चुकी है। इस तथ्य ने मामले को और पेचीदा बना दिया है, जिससे पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
असली पहचान और मोबाइल का रहस्य—जांच जारी
वहीं, हाथरस सिटी जीआरपी थाना अध्यक्ष स्वेश कुमार ने बताया कि शव की शिनाख्त अभी तक नहीं हो सकी है और यही इस केस की सबसे बड़ी कड़ी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल मृतक तक कैसे पहुंचा और शव आखिर किसका है।
फिलहाल यह पूरा मामला एक जटिल पहेली बन चुका है, जिसमें हर नया तथ्य एक नया सवाल खड़ा कर रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि शव की पहचान होते ही इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।






