रेलवे में निजीकरण पर रोक की मांग, मजदूर यूनियन की बैठक में उठे कई अहम मुद्दे
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फतेहगढ़ स्थित रेलवे मजदूर यूनियन शाखा में मंगलवार को आयोजित बैठक में रेलवे कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में पहुंचे नॉर्थ ईस्ट रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री बसंत चतुर्वेदी ने रेलवे में बढ़ते निजीकरण और निगमीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों और रेल सुरक्षा को देखते हुए सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, कर्मचारियों के साथ हुई विस्तृत चर्चा
महामंत्री बसंत चतुर्वेदी के फतेहगढ़ शाखा पहुंचने पर यूनियन पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया। इसके बाद आयोजित बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और संगठन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। चतुर्वेदी ने कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
निजीकरण से सुरक्षा और गुणवत्ता पर असर का जताया खतरा
बैठक को संबोधित करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि रेलवे में बढ़ता निजीकरण भविष्य में रेल संरक्षा और यात्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनका कहना था कि लगातार पदों को समाप्त करना या सेवाओं को निजी हाथों में देना कर्मचारियों और रेलवे व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय से हजारों पद खाली पड़े हैं और इससे कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
नई पेंशन योजना समाप्त कर ओपीएस बहाली की मांग
बैठक में नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। यूनियन नेताओं का कहना था कि रेलवे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था जरूरी है। इसके अलावा आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने और रनिंग कर्मचारियों को किलोमीटर भत्ते के आधार पर भुगतान करने की मांग भी रखी गई।
70% आय पर आयकर छूट समेत 18 मांगों पर चर्चा
यूनियन ने रनिंग कर्मचारियों की आय के 70 प्रतिशत हिस्से को आयकर से छूट देने की मांग की। साथ ही ट्रैक मेंटेनरों की पेट्रोलिंग दूरी 12 किलोमीटर से अधिक न रखने, कर्मचारियों की ड्यूटी अधिकतम 8 घंटे निर्धारित करने और एचओईआर (Hours of Employment Regulations) प्रणाली को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई। बैठक में कुल 18 मांगों पर चर्चा करते हुए इन मुद्दों को सरकार और रेलवे प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे कर्मचारी
बैठक के दौरान यूनियन के कई पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत बनाने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की रणनीति तैयार करने पर भी सहमति जताई।






