₹700 देने पर भड़की स्टाफ नर्स! कायमगंज CHC में प्रसव के बाद पैसे मांगने का आरोप, परिजनों से मारपीट का वीडियो वायरल
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फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के बाद कथित अवैध वसूली और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात संविदा स्टाफ नर्स ने सुरक्षित प्रसव के बाद प्रसूता के परिजनों से 2100 रुपये की मांग की। जब परिजनों ने स्वेच्छा से 700 रुपये दिए तो नर्स नाराज हो गई और रुपयों को फेंकते हुए प्रसूता के देवर को थप्पड़ मार दिया। पीड़ित परिवार ने इस पूरे मामले की शिकायत अस्पताल प्रशासन से की है।
वीडियो बनाने पर बढ़ा विवाद, मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट करने का आरोप
पीड़ित परिवार के अनुसार, घटना 7 मार्च 2026 की रात करीब 1 बजे की है, जब गऊटोला निवासी जगतराम की पुत्रवधू जनदेवी पत्नी विजय राजपूत ने अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद नर्स द्वारा कथित रूप से पैसे मांगने और अभद्रता करने पर वहां मौजूद अन्य तीमारदारों ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि वीडियो बनते देख नर्स और भड़क गई और उसने अन्य लोगों को बुलाकर परिजनों के साथ मारपीट कर दी। इस दौरान एक एंबुलेंस चालक ने तीमारदार का मोबाइल छीनकर एक वीडियो डिलीट कर दिया, हालांकि एक वीडियो सुरक्षित बचा लिया गया जिसे साक्ष्य के तौर पर अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया गया है।
शिकायत के बाद नर्स का स्थानांतरण, जांच के आदेश
मामले की शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संविदा स्टाफ नर्स शीतल विश्वकर्मा का प्रशासनिक आधार पर कायमगंज CHC से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिठौली (राजेपुर) में स्थानांतरण कर दिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि घटना को गंभीरता से लेते हुए नर्स से स्पष्टीकरण तलब किया गया है और डिप्टी सीएमओ सहित अधिकारियों की एक समिति गठित कर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में दोष सिद्ध होने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।
सरकारी अस्पतालों में अवैध वसूली के आरोप पहले भी उठते रहे
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकारी अस्पतालों में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, जिन पर कई बार जांच और कार्रवाई की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ-स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध हैं, इसलिए ऐसी शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।






