जनसंघ से भाजपा तक संगठन को खड़ा करने वाले ‘लोकतंत्र सेनानी’ को अंतिम विदाई।
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जनपद के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और लोकतंत्र सेनानी सरनाम सिंह गंगवार का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने उनके निधन को संगठन और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
1929 में कायमगंज क्षेत्र के गांव में हुआ था जन्म
सरनाम सिंह गंगवार का जन्म 25 जनवरी 1929 को कायमगंज क्षेत्र के ग्राम लहरा रजा कुलीपुर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने कानपुर के बीएसएसडी कॉलेज से बीए और डीएवी कॉलेज से हिंदी विषय में एमए की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया और डीएवी कॉलेज रजलामई से शिक्षक पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त की।
जनसंघ के दौर से शुरू हुआ लंबा राजनीतिक सफर
सरनाम सिंह गंगवार का राजनीतिक जीवन जनसंघ के समय से ही शुरू हो गया था। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद उन्हें फर्रुखाबाद का पहला जिलाध्यक्ष बनाया गया और उन्होंने कई कार्यकाल तक इस पद पर रहकर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कायमगंज विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा और लंबे समय तक भाजपा की वैचारिक राजनीति को जनपद में आगे बढ़ाया।
आपातकाल में किया विरोध, सात बार गए जेल
आपातकाल के दौरान उन्होंने खुलकर विरोध किया, जिसके चलते उन्हें डीआईआर और मीसा के तहत जेल भेजा गया। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वे अपने जीवन में कुल सात बार जेल गए। उनके संघर्ष और योगदान को देखते हुए शासन की ओर से उन्हें ‘लोकतंत्र सेनानी’ के सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
सामाजिक जीवन में भी निभाई अहम भूमिका
राजनीति के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे अपने गांव की ग्राम सभा के प्रधान रहे और कायमगंज सहकारी चीनी मिल के निदेशक पद पर भी कार्य किया। छात्र जीवन के दौरान उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, दीनदयाल उपाध्याय और बाबूलाल देवरस जैसे प्रमुख नेताओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिसने उनके राजनीतिक और वैचारिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।
परिवार में तीन पुत्र और एक पुत्री
सरनाम सिंह गंगवार अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी शकुंतला देवी का निधन कोरोना काल में हो चुका है। उनके तीन पुत्र—जगवीर सिंह गंगवार (शिक्षक), कृष्णवीर सिंह गंगवार (लोकतंत्र सेनानी) और श्यामवीर सिंह गंगवार (इंजीनियर) हैं। उनकी एक पुत्री सुषमा गंगवार दिल्ली में निवास करती हैं। परिवार में पौत्र बिंकी सिंह गंगवार, वीर बहादुर सिंह गंगवार, तन्मय गंगवार और पौत्री पारुल गंगवार भी हैं।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
निधन की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। तहसीलदार विक्रम सिंह चाहर और लेखपाल ने परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। एसडीएम अतुल कुमार सिंह ने बताया कि लोकतंत्र सेनानी सरनाम सिंह गंगवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।






