ग्राम पंचायत की जमीन पर बुद्ध विहार, शिकायत के बाद प्रशासन ने रुकवाया निर्माण
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संवाद 24 संवाददाता।थाना मेरापुर क्षेत्र के ग्राम संघर्ष में प्रस्तावित “महासमता पुस्तकालय एवं बुद्ध विहार” के निर्माण कार्य को प्रशासन ने फिलहाल रोक दिया है। ग्राम पंचायत की भूमि पर कब्जे के आरोपों और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच राजस्व विभाग को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जाएगा।
ग्राम संघर्ष निवासी राघव दीक्षित ने कुछ दिन पूर्व जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव में संचालित संस्था द्वारा पर्यटन विभाग को गुमराह कर ग्राम पंचायत की भूमि (गाटा संख्या 912, लगभग 0.0810 हेक्टेयर) पर बुद्ध विहार और पुस्तकालय का निर्माण कराया जा रहा है। शिकायत में कहा गया कि उक्त भूमि अभिलेखों में सरकारी पुस्तकालय के नाम दर्ज है, जबकि उस पर अवैध कब्जे का प्रयास किया गया। बताया गया कि इस भूमि को लेकर संबंधित पक्ष के विरुद्ध तहसीलदार न्यायिक न्यायालय में धारा 67 के तहत मामला भी विचाराधीन है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संस्था के पदाधिकारियों ने भगवान बुद्ध से जुड़ी धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजना के नाम पर सरकारी धन का उपयोग कब्जा मजबूत करने के लिए किया है। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।
पर्यटन विभाग के अनुसार “भगवान बुद्ध की नगरी” नामक संस्था से जुड़े पांच बुद्ध विहारों के विकास के लिए शासन स्तर से 9 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई थी। योजना के अंतर्गत श्रीलंका बुद्ध विहार, महासमता पुस्तकालय एवं बुद्ध विहार और जापानी बुद्ध विहार सहित कई स्थलों पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं। जापानी बुद्ध विहार परिसर में फिलहाल निर्माण शुरू नहीं हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर इंटरलॉकिंग और प्रारंभिक निर्माण कार्य कराया जा चुका है।
परियोजना के प्रारंभिक नक्शों को शासन स्तर पर सामान्य घोषित किए जाने के बाद अब अलग-अलग डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाकर अनुमति ली जा रही है। लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण चालू वित्तीय वर्ष में कार्य पूरा होना कठिन माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब तक कुल परियोजना का लगभग 10 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है और करीब 90 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर शिकायत की जांच के लिए राजस्व विभाग को पत्र भेज दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, संबंधित बुद्ध विहार के निर्माण कार्य को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व अभिलेखों, भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वीकृत योजना की वैधता की जांच के बाद ही आगे निर्माण की अनुमति या रोक पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि यदि भूमि सरकारी या ग्राम पंचायत की पाई गई तो निर्माण कार्य स्थायी रूप से रोका जा सकता है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है। वहीं, यदि अभिलेख और स्वीकृतियां सही पाई गईं तो परियोजना पुनः शुरू की जा सकती है।
फिलहाल गांव में निर्माण कार्य बंद है और स्थानीय लोगों की नजरें अब राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद का भविष्य तय करेगी।






