एक्सीडेंट पर सख्ती: फर्रुखाबाद में दुर्घटना होने पर ड्राइविंग लाइसेंस होगा निरस्त, जनवरी में 42 हादसों में 26 मौतें
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संवाद 24 संवाददाता। जनपद में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़ों ने प्रशासन को कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया कि अब गंभीर सड़क दुर्घटना के मामलों में संबंधित वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) निरस्त किया जाएगा।
बैठक में एआरटीओ विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता स्पष्ट कर दी। वर्ष 2026 के जनवरी माह में जनपद में कुल 42 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 26 लोगों की मौत हुई। वहीं पिछले वर्ष जनवरी में 24 दुर्घटनाओं में 17 लोगों की जान गई थी। यानी दुर्घटनाओं और मृत्यु दर—दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर मृतकों की संख्या लगभग स्थिर रही है और राज्य मार्गों पर कुछ कमी देखने को मिली है, लेकिन मुख्य जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर दुर्घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि जनपद सीमा के भीतर कोई अत्यधिक बड़े पैमाने की दुर्घटना सामने नहीं आई, फिर भी छोटी-छोटी लापरवाहियों ने मौतों का आंकड़ा बढ़ाया है।
जिलाधिकारी ने पुलिस और परिवहन विभाग को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-19 के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके तहत यदि किसी सड़क दुर्घटना में चालक की लापरवाही सिद्ध होती है और उसमें एक या अधिक व्यक्तियों की मृत्यु होती है, तो लाइसेंसिंग प्राधिकारी द्वारा चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
निर्देशों के मुताबिक अब प्रत्येक माह ऐसी सभी दुर्घटनाओं की विस्तृत सूचना — जिसमें प्राथमिकी (एफआईआर) और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस का विवरण शामिल होगा — पुलिस विभाग द्वारा एआरटीओ (प्रशासन) को अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी। इसके आधार पर लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रशासन का मानना है कि अब तक अधिकांश दुर्घटनाओं में चालक की लापरवाही, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण रहे हैं। डीएल निरस्तीकरण की कार्रवाई से न केवल दोषी चालकों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि अन्य वाहन चालकों में भी कानून का भय पैदा होगा और सड़क सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
बैठक में लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और पूर्ति विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने ब्लैक-स्पॉट चिन्हित करने, साइन बोर्ड लगाने, प्रकाश व्यवस्था सुधारने और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया समय कम करने जैसे उपायों पर भी चर्चा की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की भी समान भागीदारी आवश्यक है। हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन और नशे में वाहन न चलाना ही दुर्घटनाओं को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।






