फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य विभाग सख्त: कुलवंती अस्पताल सील, पांच और निजी अस्पतालों पर कार्रवाई

संवाद 24 संवाददाता। शहर के मसेनी चौराहा क्षेत्र में संचालित कुलवंती अस्पताल को एक महिला मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। घटना के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इटावा जनपद के उसराहार थाना क्षेत्र के मोहरी गांव निवासी राखी (पत्नी शिवकांत) को उपचार के लिए कुलवंती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसकी अचानक मृत्यु हो गई। उस समय अस्पताल परिसर में परिजन और पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया और तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अवनीन्द्र कुमार टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई महत्वपूर्ण अव्यवस्थाएं सामने आईं — जिनमें उपचार संबंधी व्यवस्थाएं, रिकॉर्ड और मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में भर्ती मरीजों को राजकीय एम्बुलेंस से डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सुरक्षित स्थानांतरित कराया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से कुलवंती अस्पताल को सील कर दिया।

पूरे प्रकरण की जांच के लिए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति मौत के कारण, उपचार प्रक्रिया और अस्पताल की वैधानिक स्थिति सहित सभी पहलुओं की जांच करेगी।

इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मसेनी चौराहा क्षेत्र में संचालित अन्य निजी अस्पतालों पर भी सख्ती दिखाई। नारायण अस्पताल, स्वास्तिक अस्पताल, महालक्ष्मी हॉस्पिटल, गणेश हॉस्पिटल और बी.के. हॉस्पिटल में भी जांच और आवश्यक कार्रवाई की गई। विभाग का कहना है कि मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर आगे और कठोर कदम उठाए जाएंगे।

सीएमओ डॉ. अवनीन्द्र कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले में बिना मानक और बिना वैध अनुमति संचालित अस्पतालों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

घटना के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे निजी अस्पतालों में अक्सर मानक सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी रहती है, जिससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित होती है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि गंभीर स्थिति में उपचार के लिए अधिकृत एवं मान्यता प्राप्त अस्पतालों का ही चयन करें।

Anuj Singh
Anuj Singh

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