टीईटी अनिवार्यता पर उबाल: हजारों शिक्षक सड़कों पर, बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा तेज
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संवाद 24 संवाददाता। जिले में गुरुवार को शिक्षक संगठनों ने टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता के विरोध में बड़ा आंदोलन करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अवनीश चौहान ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री राजकिशोर शुक्ल और राकेश यादव ने संयुक्त रूप से किया। धरना स्थल पर वक्ताओं ने टीईटी अनिवार्यता को शिक्षकों के लिए अनुचित बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया और सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई।
धरने में पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अभिनेता मिश्रा, जिला मंत्री वीरेंद्र त्रिवेदी, महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष अलका कौशल, जिला मंत्री सीता यादव सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों की बड़ी संख्या ने आंदोलन को समर्थन दिया। आयोजकों का दावा है कि हजारों शिक्षक कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला।
प्रदर्शन को लेकर विवाद भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार परिषदीय विद्यालयों का निर्धारित समय दोपहर तीन बजे तक है, जबकि कई शिक्षक लगभग एक बजे ही विद्यालय छोड़कर बीएसए कार्यालय पहुंच गए। इस कारण विद्यालय समय के दौरान शिक्षकों की अनुपस्थिति और शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका को लेकर अभिभावकों तथा स्थानीय लोगों में चर्चा तेज हो गई है।
दिलचस्प तथ्य यह भी रहा कि पूरा कार्यक्रम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में संपन्न हुआ, लेकिन विद्यालय समय में शिक्षकों की बड़ी संख्या के एकत्र होने को लेकर किसी प्रकार की पूछताछ या कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रशासनिक सख्ती, शैक्षणिक अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह घटना केवल एक विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक नीतियों पर बहस तेज हो गई है। एक ओर शिक्षक संगठन इसे अपने अधिकारों और सेवा शर्तों से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालय समय में धरना-प्रदर्शन में भागीदारी को लेकर शैक्षणिक अनुशासन और विद्यार्थियों के हितों पर चिंता जताई जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या शिक्षकों की मांगों पर कोई नीति-स्तरीय निर्णय होगा, और क्या विद्यालय समय में प्रदर्शन को लेकर कोई प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल, टीईटी अनिवार्यता का मुद्दा जिले में शिक्षा और प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर चर्चा का विषय बन चुका है।






