जिला कारागार का औचक निरीक्षण, बंदियों से संवाद कर जानी समस्याएं; निःशुल्क विधिक सहायता पर दिया जोर
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संवाद 24 संवाददाता। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की सचिव एवं न्यायिक अधिकारी प्रियंका गांधी ने बुधवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया और बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान कारागार में उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं की स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
निरीक्षण के समय सचिव ने बंदियों से उनकी दैनिक दिनचर्या, भोजन, चिकित्सा सुविधाओं तथा पेशी से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने जेल में मौजूद चिकित्सक डॉ. नीरज से बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था और उपचार प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। विशेष रूप से बीमार एवं वृद्ध बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण को नियमित रूप से सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
सचिव प्रियंका गांधी ने जेल प्रशासन को भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही भोजन वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं व्यवस्थित रखने के लिए नियमित निगरानी की बात कही।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने बंदियों की अदालत में पेशी की तिथियों, कानूनी प्रक्रिया तथा अन्य सुविधाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बंदियों के पास पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है, वे कारागार अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फर्रुखाबाद को प्रार्थना पत्र भेजकर निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को न्याय तक समान पहुंच उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर जिला कारागार अधीक्षक अरविंद श्रीवास्तव, जेलर वैभव कुशवाहा, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल सुरेंद्र कुमार राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के अंत में सचिव ने अधिकारियों को बंदियों के अधिकारों के संरक्षण और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का भी केंद्र होना चाहिए।






