लखनऊ कूच से पहले फर्रुखाबाद में कांग्रेस पदाधिकारी नजरबंद, विधानसभा घेराव में जाने से रोका
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संवाद 24 संवाददाता। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों को पुलिस ने उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया। ये सभी नेता मंगलवार को लखनऊ में प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना होने वाले थे। पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी और आवासों पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अंकुर मिश्रा के अनुसार उन्हें रविवार देर रात लगभग 2 बजे से ही पुलिस निगरानी में रखा गया। उनके आवास के बाहर पुलिस वाहन खड़ा कर दिया गया और सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई। मिश्रा का कहना है कि सोमवार शाम और मंगलवार सुबह दोनों समय उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे वे पार्टी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
पुलिस ने केवल शहर अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि संगठन के अन्य पदाधिकारियों पर भी समान कार्रवाई की। यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष अम्मार अली, यूथ जिला उपाध्यक्ष आरिफ अली तथा जिला महासचिव शादाब खान को सोमवार शाम लगभग 8 बजे से उनके घरों पर ही रोक दिया गया। उनके आवासों पर भी पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई, ताकि वे जिले से बाहर न जा सकें
कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा के नाम में बदलाव सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर लखनऊ में विधानसभा घेराव का आह्वान किया था। पार्टी ने हर जिले से पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को राजधानी पहुंचने के निर्देश दिए थे। इसी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया।
शहर अध्यक्ष अंकुर मिश्रा ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पार्टी गरीबों, मजदूरों और श्रमिकों से जुड़े मुद्दे उठा रही है और नेताओं को कार्यक्रम में जाने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग किया जा रहा है।
हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शांति-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कई जिलों में एहतियाती निगरानी रखी जाती है।
फिलहाल फर्रुखाबाद में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। विधानसभा घेराव को लेकर प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तनातनी ने आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति को और सक्रिय करने के संकेत दे दिए हैं।






