कायमगंज में चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुष्कर्म आरोपियों पर पड़ी सीधी चोट
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संवाद 24 संवाददाता। कायमगंज तहसील क्षेत्र के कंपिल थाना अंतर्गत पांच माह पूर्व एक छात्रा से दुष्कर्म के चर्चित मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों से जुड़े अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। मंगलवार तड़के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अतुल कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सरकारी जमीन पर बने कब्जों को हटाया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आरोपियों तथा संबंधित कब्जाधारकों को पूर्व में ही नोटिस जारी कर निर्धारित तिथि तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था। निर्देशों का पालन न होने पर राजस्व टीम और पुलिस बल के साथ बुलडोजर मौके पर पहुंचा और अतिक्रमण ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
शमसाबाद के नायब तहसीलदार अनवर हुसैन की देखरेख में लेखपालों की टीम ने कोचिंग सेंटर के सामने स्थित उन दुकानों को चिन्हित किया जो आरोपी शीबू और सलमान से संबंधित बताई जा रही थीं। जांच में पाया गया कि दुकानें सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई थीं। प्रशासन ने जेसीबी मशीन से उन्हें गिराकर भूमि को कब्जामुक्त कराया।
इसी क्रम में आरोपी अनस के गांव निजामुद्दीनपुर में गाटा संख्या 336 की “नवीन परती” भूमि पर अवैध कब्जा भी मिला, जिसे हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम ने क्षेत्र के शकील मार्केट का भी सीमांकन कराया। राजस्व अभिलेखों के परीक्षण में मार्केट का कुछ हिस्सा कब्रिस्तान की भूमि पर निर्मित होने की आशंका जताई गई है। हालांकि मार्केट स्वामी शकील ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि निर्माण नगर पंचायत के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है तथा मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका दुष्कर्म प्रकरण के आरोपियों से कोई संबंध नहीं है।
ध्वस्तीकरण के दौरान संभावित तनाव को देखते हुए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई पूरी तरह राजस्व अभिलेखों और वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
स्थानीय प्रशासन इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की प्रक्रिया से जोड़कर देख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों द्वारा किए गए अवैध कब्जों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर सरकारी भूमि मुक्त कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में निवारक प्रभाव पड़े।






