डायरिया की अनदेखी पेरेंट्स को पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने किया अलर्ट
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संवाद 24 संवाददाता। बच्चों में होने वाली डायरिया की बीमारी को हल्के में लेना गंभीर परिणाम दे सकता है। यह बीमारी किसी भी मौसम में हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यह बात जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव ने ठंडी सड़क एवं राजीव गांधी नगर में आयोजित टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही।
डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि डायरिया की स्थिति में बच्चों को बार-बार पानी जैसे पतले दस्त होने लगते हैं, जिससे शरीर में तेजी से पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। यही कमी बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाती है। इससे बचाव के लिए पांच वर्ष तक के बच्चों को ओआरएस घोल और जिंक की गोलियां दी जाती हैं, जो शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी को पूरा कर बच्चे की जान बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने परिजनों से अपील की कि यदि किसी बच्चे को दो या तीन बार से अधिक पानी जैसे दस्त हों, तो तुरंत अपने क्षेत्र की आशा बहू या एएनएम से संपर्क करें। समय पर ओआरएस और जिंक का उपयोग करने से डायरिया से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। लापरवाही या देरी बच्चों की स्थिति को गंभीर बना सकती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. यादव ने नियमित टीकाकरण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका पूर्ण टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। नियमित टीकाकरण से बच्चों को 12 घातक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है, इसलिए सभी अभिभावकों को चाहिए कि वे समय पर अपने बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं।
इस अवसर पर पॉपुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया, लखनऊ से आए सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अनिल द्विवेदी, अमरीश पांडे और अनुपम मिश्र, यूएनडीपी से मानव शर्मा, नगरीय स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ. शिवानी, फार्मासिस्ट पंकज, एएनएम आरती सागर तथा आशा कार्यकर्ता संध्या सहित कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर लोगों को डायरिया से बचाव, स्वच्छता और समय पर इलाज के प्रति जागरूक किया।






