भाजपा ने बजट को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में ऐतिहासिक बताया।
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संवाद 24 संवाददाता। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट को लेकर जनपद में सियासी बहस तेज हो गई है। इसी क्रम में रविवार को आवास विकास स्थित माधव मैक्स अस्पताल में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बजट पर चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा ने की।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कृष्ण मोहन पांडे, जिला संगठन प्रभारी शिव महेश दुबे सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने लाइव स्क्रीन पर बजट प्रस्तुति देखी और इसके विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की। भाजपा नेताओं ने बजट को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह लगातार नौवां बजट है, जिसमें गांव, गरीब, किसान, युवा, व्यापारी, महिला और वंचित वर्गों को ध्यान में रखकर जनकल्याणकारी निर्णय लिए गए हैं। उनके अनुसार रक्षा क्षेत्र, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, डेटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल्स और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले प्रावधान इस बजट की विशेषता हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच मध्यम वर्ग, उद्योग, स्टार्टअप और निवेशकों को राहत देने के लिए कर सुधार, नियमों में सरलता और लागत घटाने जैसे कदम उठाए गए हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए छोटे उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन देने की नीति अपनाई गई है।
जिला संगठन प्रभारी शिव महेश दुबे ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक फैसले किए हैं, जिनका प्रभाव वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह बजट भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और मजबूती देगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा ने कहा कि बजट में बुजुर्गों, मध्यमवर्गीय परिवारों और किसानों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने अखरोट, बादाम और नारियल जैसी फसलों की खेती से जुड़े किसानों को मिलने वाले लाभों का उल्लेख करते हुए इसे समावेशी बजट बताया। साथ ही कहा कि “जब समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा, तभी देश वास्तव में विकसित होगा।”
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट को लेकर फर्रुखाबाद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं। जहां भाजपा इसे भविष्य की मजबूत नींव बताकर जनकल्याणकारी बता रही है, वहीं सपा इसे जमीनी हकीकत से दूर केवल आश्वासनों का दस्तावेज मान रही है।






