जानलेवा हमले के 18 वर्ष पुराने मामले में दोषी को उम्रकैद, 7 हजार जुर्माना
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संवाद 24 संवाददाता। जनपद में वर्ष 2007 के एक चर्चित जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-एक, शैली रॉय ने शनिवार को आरोपी बंटू को उम्रकैद के साथ सात हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश भी दिया गया है।
यह मामला थाना नवाबगंज क्षेत्र के गांव बबुरारा का है। पीड़ित प्रमोद कुमार ने 28 अगस्त 2007 को दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि वह शाम करीब छह बजे खेत से घर लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के रामबहादुर, राजकुमार, उनके पुत्र बंटू और रामप्रकाश ने रास्ते में रोककर उनसे विवाद किया और टकोरा व लाठी-डंडों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पीड़ित के अनुसार, आरोपियों का उद्देश्य उनकी चाची रामबिटोली की जमीन पर कब्जा करना था और विरोध करने पर यह जानलेवा हमला किया गया।
पुलिस द्वारा विवेचना पूरी कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी पाया। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी रामप्रकाश की मृत्यु हो गई थी। इससे पूर्व, 2 दिसंबर 2025 को दोषी के पिता और ताऊ को भी इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी बंटू के अवयस्क होने का दावा करते हुए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इस पर अदालत ने प्राथमिक विद्यालय बबुरारा के प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर विद्यालय अभिलेख तलब किए। स्कूल के एसआर रजिस्टर, प्रवेश फार्म, टीसी रजिस्टर और मेडिकल रिपोर्ट के गहन परीक्षण के बाद न्यायालय ने 29 जनवरी को बंटू को वयस्क घोषित किया, जिसके बाद सजा पर अंतिम निर्णय सुनाया गया।
अदालत के इस फैसले को 18 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यह निर्णय भूमि विवादों में हिंसा को लेकर एक कड़ा संदेश भी देता है कि कानून के समक्ष ऐसे अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा






