फर्रुखाबाद में पीएम आदर्श ग्राम योजना: नए चयन के साथ पुराने सवाल बरकरार
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संवाद 24 संवाददाता। जिले में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत एक बार फिर गांवों के विकास की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में जनपद के 13 गांवों का चयन किया है, जिनमें से एक गांव नगर पंचायत में शामिल होने के कारण अब 12 गांवों में ही विकास कार्य कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना और समग्र ग्रामीण विकास को गति देना है।
योजना के अंतर्गत चयनित गांवों में स्वच्छता, आधारभूत ढांचा और सामाजिक सुविधाओं से जुड़े कार्य कराए जाने हैं। इनमें कूड़ा निस्तारण केंद्र, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र, सोकपिट और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक गांव को 20 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी विकास कार्यों के लिए प्रदान की जाती है, जिसे संबंधित विभागों के सहयोग से खर्च किया जाता है।
इस वर्ष जिन 12 गांवों में कार्य प्रस्तावित हैं, उनमें कायमगंज ब्लॉक के खेमपुर लोधीपुर, होतेपुर, सिकंदरपुर छितमा, मीरपुर, कमरुद्दीनपुर और मानिकपुर लोधीपुर शामिल हैं। इसके अलावा शमसाबाद ब्लॉक का अलियापुर, कमालगंज का भरतामऊ, मोहम्मदाबाद के जैतपुर, बिहार और सिथौपुर कुर्मी तथा नवाबगंज के तुर्क ललई और वीरपुर गांव भी योजना में शामिल किए गए हैं। पुनपालपुर गांव नगर पंचायत खिमसेपुर में शामिल हो जाने के कारण उसे सूची से बाहर रखा गया है।
हालांकि नए गांवों के चयन के साथ ही योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में चयनित 20 गांवों में अब तक विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। स्थिति यह है कि इन गांवों के लिए अभी तक कार्यों का एस्टीमेट तक तैयार नहीं किया जा सका है, जिससे योजना की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इससे पहले वर्ष 2018-19 और 2019-20 में भी जिले के 20 गांव प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में चयनित किए गए थे। इनमें से दो गांव नगर पंचायत में शामिल हो जाने के बाद शेष 18 गांवों के लिए तीन करोड़ 34 लाख 39 हजार 575 रुपये की धनराशि कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को उपलब्ध कराई गई थी। इन गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट, नाली निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र, खाद के गड्ढे, कूड़ाघर और सोकपिट जैसे कार्य कराए जा रहे हैं।
यूपी सिडको के सहायक अभियंता आशीष कुमार के अनुसार, शासन से नवंबर 2025 में धनराशि प्राप्त हुई थी, जिसके बाद कार्यों में तेजी आई है। अब तक लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरे किए जा चुके हैं और शेष 30 प्रतिशत कार्य मार्च से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के प्रभारी सहायक प्रबंधक राहुल राजपूत ने बताया कि 2022-23 में चयनित गांवों की डीपीआर तैयार की जा रही है। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद एस्टीमेट बनाकर शासन से धनराशि की मांग की जाएगी। साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में चयनित गांवों के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत नए गांवों के चयन से जहां विकास की नई उम्मीदें बनी हैं, वहीं पुराने चयनित गांवों में कार्यों की धीमी प्रगति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि इस बार योजना का लाभ गांवों तक कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंच पाता है।






