2500 हेक्टेयर फसल बर्बाद, कायमगंज चीनी मिल का पेराई सत्र बंद होने की कगार पर
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संवाद 24 संवाददाता। कायमगंज क्षेत्र में इस वर्ष आई बाढ़ ने तराई इलाके की गन्ने की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बाढ़ की चपेट में आकर लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जिसका सीधा असर कायमगंज चीनी मिल के पेराई सत्र पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि मिल का पेराई सत्र समय से पहले बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है
गन्ने की कम उपलब्धता को देखते हुए मिल प्रशासन ने किसानों से बिना पर्ची के गन्ना खरीदने की व्यवस्था शुरू की है। इसके साथ ही पेराई सत्र बंद किए जाने का अंतिम नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इसके बावजूद मिल को अपेक्षित मात्रा में गन्ने की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
गन्ने की कम आवक के चलते हाजियांपुर क्रय केंद्र को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहीं, पांच अन्य क्रय केंद्रों को बंद किए जाने का नोटिस जारी किया गया है। इससे किसानों के साथ-साथ मिल की पेराई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
कायमगंज चीनी मिल में इस पेराई सत्र की शुरुआत 19 नवंबर से हुई थी। अब तक करीब 7.15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की जा चुकी है, जिससे लगभग 6500 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस समय तक लगभग डेढ़ लाख क्विंटल अधिक गन्ने की पेराई हुई है, लेकिन बाढ़ के कारण आगे गन्ना मिलने की संभावनाएं बेहद कम हो गई हैं।
पिछले वर्ष जहां 4500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई थी, वहीं इस वर्ष यह घटकर लगभग 4000 हेक्टेयर रह गई। इनमें से भी तराई क्षेत्र के 2500 हेक्टेयर में बाढ़ के चलते फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। ऐसे में मिल के लिए 16 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल नजर आ रहा है।
सीसीओ प्रमोद यादव ने बताया कि गन्ने की कमी को देखते हुए बिना पर्ची के गन्ना खरीदा जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। उनका अनुमान है कि पेराई कार्य अधिकतम तीन फरवरी तक ही चल सकेगा। वहीं, जीएम रमेश सिंह ने कहा कि बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे मिल को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति में तय पेराई लक्ष्य हासिल कर पाना बेहद कठिन हो गया है।
निष्कर्ष बाढ़ की मार और घटती खेती के रकबे ने कायमगंज चीनी मिल के पेराई सत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है। गन्ने की कमी से जहां मिल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, वहीं किसानों और मिल प्रशासन दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।






