अमेरिकी टैरिफ के बीच फर्रुखाबाद के निर्यातकों ने निकाला व्यावहारिक समाधान

संवाद 24 संवाददात। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद फर्रुखाबाद के निर्यातकों ने अमेरिकी कारोबारियों के साथ मिलकर संकट से निकलने का रास्ता तलाश लिया है। आपसी सहमति के तहत भारतीय निर्यातकों ने उत्पादों की कीमत में 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट दी, जबकि अमेरिकी खरीदारों ने बढ़े हुए टैरिफ का बोझ स्वयं वहन करने पर सहमति जताई। इस समझौते से जिले को 10 करोड़ रुपये से अधिक के नए निर्यात ऑर्डर मिले हैं।

टैरिफ लागू होने के बाद फर्रुखाबाद की कुशन, टेबल कवर और अन्य घरेलू उत्पाद निर्यात करने वाली कई फैक्ट्रियों में उत्पादन लगभग ठप हो गया था। मुंबई पोर्ट से करीब 60 लाख रुपये का माल वापस लौटने से कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि, हालिया समझौते के बाद बीते पखवाड़े में नए ऑर्डर मिलने से फैक्ट्रियों में फिर से उत्पादन शुरू हो गया है और श्रमिकों को भी काम मिलने लगा है

टैरिफ से पहले फर्रुखाबाद से अमेरिका को हर वर्ष 100 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जाता था। जिले से कुशन, टेबल कवर, वॉलपेपर, हाथ से सिली रजाई (क्विल्ट), कॉटन बैग, तौलिया, बेडशीट और चमड़े की दरी जैसे उत्पाद अमेरिका भेजे जाते हैं। टैरिफ संकट के बाद कई निर्यातकों ने फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों की ओर भी रुख किया है, जिससे निर्यात के नए विकल्प तैयार हो रहे हैं।

चमड़े की कारपेट के निर्यातक विकास गुप्ता के अनुसार, अमेरिका से नए ऑर्डर मिलते ही फैक्ट्री में उत्पादन बढ़ाया गया है और गुणवत्ता में कोई कटौती नहीं की गई है। वहीं अमेरिकी व्यवसायियों ने यह संकेत दिया है कि यदि बाजार की मांग के अनुसार डिजाइन में बदलाव किया जाए, तो उत्पादों की बिक्री प्रभावित नहीं होगी। इससे भविष्य में उत्पाद नवाचार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

टैक्स बार एसोसिएशन फर्रुखाबाद के महासचिव रामजी बाजपेई बताते हैं कि किसी भी देश में निर्यात होने वाले भारतीय उत्पाद पर लगने वाला टैक्स वहां के खरीदार को देना होता है। निर्यात के समय टैक्स का भुगतान किया जाता है, जबकि उत्पाद की मूल कीमत भारतीय निर्यातक तय करते हैं। मौजूदा स्थिति में भारतीय निर्यातकों ने कीमत कम की है और अमेरिकी कारोबारी वहां उत्पाद का मूल्य बढ़ाकर बिक्री कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करता है।

कुल मिलाकर, भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी कारोबारियों के बीच बनी आपसी सहमति ने टैरिफ संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया है। 10 करोड़ रुपये से अधिक के नए ऑर्डर मिलने से न केवल फर्रुखाबाद के निर्यात कारोबार को संबल मिला है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि संवाद और लचीलापन वैश्विक व्यापार में कठिन परिस्थितियों का प्रभावी समाधान हो सकता है।

Anuj Singh
Anuj Singh

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