पांचाल की विरासत से भारत की पहचान तक: श्रीरामनगरिया मेले में गूंजा इतिहास का स्वर

संवाद 24 संवाददाता। आज मेला श्रीरामनगरिया के सांस्कृतिक पंडाल में पांचाल शोध एवं विकास समिति के तत्वावधान में भव्य पांचाल सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि प्राचीन पांचाल सभ्यता की ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत को जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करने का एक गंभीर और सार्थक प्रयास साबित हुआ। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।

अतिथियों का स्वागत और सम्मेलन का प्रारंभ
सम्मेलन की शुरुआत समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सोमवंशी द्वारा उपस्थित अतिथियों एवं समाजजन का स्वागत करते हुए की गई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पांचाल समाज की पहचान केवल एक जातीय या क्षेत्रीय पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के मूल आधारों में से एक है। उन्होंने समिति के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पांचाल शोध एवं विकास समिति का मुख्य लक्ष्य प्राचीन पांचाल की ऐतिहासिक भूमिका को शोध के आधार पर समाज के सामने लाना और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

मुख्य वक्ता का ऐतिहासिक विश्लेषण
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डी. के. दुबे ने अपने विस्तृत व्याख्यान में प्राचीन पांचाल की भौगोलिक स्थिति और उसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के महत्त्वपूर्ण जनपदों में पांचाल का स्थान अत्यंत विशिष्ट रहा है। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से लेकर महाभारत काल तक पांचाल क्षेत्र शिक्षा, राजनीति और संस्कृति का केंद्र रहा। उनके अनुसार, “पांचाल की सभ्यता ही पूरे भारत की सभ्यता है,” क्योंकि यहां विकसित हुई सामाजिक और सांस्कृतिक संरचनाएं बाद में सम्पूर्ण भारतीय समाज का आधार बनीं।

मुख्य वक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि पांचाल क्षेत्र की सीमाएं केवल वर्तमान जिलों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक क्षेत्र था, जिसका प्रभाव गंगा-यमुना दोआब के बड़े हिस्से पर पड़ता था। उन्होंने ऐतिहासिक ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर बताया कि पांचाल की पहचान केवल राजनीतिक सत्ता से नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के प्रसार से भी जुड़ी रही है।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि, जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने पांचाल शोध एवं विकास समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की उन्नति उसके इतिहास और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी होती है। उन्होंने समिति के सभी सदस्यों को सम्मानित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच संवाद को भी सशक्त बनाते हैं। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति के संरक्षण में प्रशासन की भूमिका सहयोगात्मक होनी चाहिए और इस दिशा में समिति के प्रयास अनुकरणीय हैं।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ना भी था। वक्ताओं ने कहा कि जब तक युवा वर्ग अपने अतीत को नहीं जानता, तब तक वह अपने भविष्य को सही दिशा नहीं दे सकता। इस दृष्टि से सम्मेलन में ऐतिहासिक तथ्यों, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक योगदान पर आधारित विचार प्रस्तुत किए गए, जिससे युवाओं में आत्मगौरव और सामाजिक चेतना का भाव उत्पन्न हो।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, सचिव मेला समिति एवं अपर जिलाधिकारी दिनेश कुमार, अधिवक्ता परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष राजेंद्र त्रिपाठी, भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र सिंह राठौड़, डी. एस. राठौर, एम. आर. पाल, महेशपाल उपकारी, प्रदीप राठौर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मेला श्रीरामनगरिया में आयोजित यह पांचाल सम्मेलन न केवल एक सामाजिक आयोजन था, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और वर्तमान के बीच सेतु का कार्य करता दिखाई दिया। मुख्य वक्ता द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक विवेचना, मुख्य अतिथि द्वारा दी गई प्रशासनिक स्वीकृति और बड़ी संख्या में समाजजन की भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि पांचाल समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूक है और उसे संरक्षित रखने के लिए संगठित प्रयास कर रहा है। इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि पांचाल सभ्यता केवल एक अतीत की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की मूल धारा का अभिन्न अंग है। समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना ही इस प्रकार के आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य है।

कार्यक्रम के समापन में सचिव मेला समिति एवं अपर जिलाधिकारी दिनेश कुमार ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए यह संदेश दिया कि इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। सम्मेलन का मूल उद्देश्य यही था कि पांचाल समाज अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक उन्नति की ओर अग्रसर हो।

Samvad 24 Office
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