पीले रंग में रंगा शहर: बसंत पंचमी पर पूजा मुहूर्त के साथ बाजार गुलजार
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संवाद 24 संवाददाता। विद्या, ज्ञान और बसंत ऋतु के स्वागत का पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आचार्यों के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ, हवन और विभिन्न शुभ कार्यों के लिए विशेष मुहूर्त उपलब्ध है। मान्यता है कि सुबह 7:20 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक का समय अत्यंत शुभ रहेगा, जिसमें मां सरस्वती की पूजा, विद्यारंभ, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
बसंत पंचमी को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक रौनक दिखाई दे रही है। बाजारों में पीले रंग की वस्तुओं की मांग तेज हो गई है। पीले वस्त्र, पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, अबीर-गुलाल और सजावटी सामानों से दुकानें सजी हुई हैं। पूजा सामग्री की दुकानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं, वीणा, किताबें और कलश की अच्छी बिक्री हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी पर्व पर बिक्री बेहतर रहने की उम्मीद है।
पर्व को लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई स्थानों पर पतंगबाजी की तैयारियां जोरों पर हैं। वहीं शिक्षण संस्थानों में भी बसंत पंचमी को लेकर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में सरस्वती पूजा, विद्यारंभ संस्कार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। भजन-कीर्तन और सरस्वती वंदना के आयोजन से माहौल भक्तिमय हो गया है।
आचार्य डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ल के अनुसार बसंत पंचमी नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन शिक्षा, कला, संगीत और ज्ञान से जुड़े कार्य आरंभ करना शुभ फलदायी होता है। इसी कारण लोग किताब, कलम और वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं, जिससे संसार में ज्ञान का प्रकाश फैला।
बसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही मौसम में भी बदलाव स्पष्ट नजर आने लगता है—ठंड धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और चारों ओर बसंत की छटा बिखर जाती है। सरसों के पीले फूल, आम के बौर और रंग-बिरंगी पतंगें पर्व की सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
सरस्वती पूजा विधि के अनुसार, इस दिन पीले वस्त्र धारण कर पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाया जाता है। मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और वेदी के दाईं ओर जल से भरा कलश रखा जाता है। बच्चे अपनी किताबें, पेन और अध्ययन से जुड़ी सामग्री मां के चरणों में रखकर पूजन करते हैं। भोग में पीले चावल, बूंदी के लड्डू और केसरिया हलवा अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप कर अंत में आरती के साथ प्रसाद वितरित किया जाता है।
कुल मिलाकर, बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और नई उम्मीदों के साथ मनाया जा रहा है। बाजारों की रौनक, शिक्षण संस्थानों की तैयारियां और भक्तिमय वातावरण इस पर्व के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं।






