फर्रुखाबाद में फसल बीमा का बड़ा खेल: भूमिहीन किसानों को बना दिया लाभार्थी
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संवाद 24 संवाददाता। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत देने के उद्देश्य से संचालित व्यवस्था में जिले में बड़े पैमाने पर गबन का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में 68 लाख रुपये के घोटाले के सामने आने के बाद, आगे की पड़ताल में फर्जी भूमि विवरण के आधार पर करीब 64 किसानों के नाम पर लगभग 70 लाख रुपये के अवैध भुगतान का मामला उजागर हुआ है। इस तरह फसल बीमा योजना में कुल गबन की राशि बढ़कर लगभग एक करोड़ 38 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2024 की रबी फसल के दौरान जिले के 232 किसानों को कुल 2.28 करोड़ रुपये का क्लेम जारी किया गया था। इनमें वास्तविक किसानों को अपेक्षाकृत कम मुआवजा मिला, जबकि फर्जी दस्तावेजों के सहारे कई लाभार्थियों को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में फसल बीमा में गबन का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने फर्रुखाबाद में भी सघन जांच के आदेश दिए, जिससे इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के निर्देश पर उपकृषि निदेशक द्वारा कराई गई जांच में तहसीलवार नायब तहसीलदार, कानूनगो और एडीओ कृषि की संयुक्त कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी। इसके आधार पर जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव बंथलशाहपुर, अमृतपुर क्षेत्र के गुड़ेरा और बलीपट्टी में 32 किसानों को फर्जी तरीके से 68 लाख रुपये का भुगतान करने के मामले में तीन बीमा कर्मियों और नौ बैंक शाखा प्रबंधकों सहित कुल 44 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, आगे की जांच में बढ़पुर ब्लॉक के कटरी गंगपुर, अजमतपुर, राजेपुर क्षेत्र के सवासी व सुंदरपुर, कायमगंज क्षेत्र के मिस्तनी और शाहीपुर समेत अन्य गांवों के 64 किसानों को लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान किया गया। मौके पर जांच के दौरान इन किसानों की संबंधित भूमि मौजूद ही नहीं पाई गई। कहीं रेत के गाटा नंबर दर्ज किए गए तो कहीं ग्राम समाज की भूमि को निजी किसानों के नाम पर दर्शाकर बीमा राशि का दावा किया गया।
अब तक की जांच में कुल 232 किसानों में से 96 किसानों को फर्जी तरीके से एक करोड़ 38 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने पर घोटाले की राशि और बढ़ सकती है। यह स्थिति दर्शाती है कि योजना के तहत वास्तविक किसानों को मिलने वाले मुआवजे से अधिक राशि फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ गई।
उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि 64 किसानों को नियमों के विरुद्ध 70 लाख रुपये का भुगतान किया गया है और जांच अंतिम चरण में है। एक-दो दिन में जांच रिपोर्ट फाइनल होने के बाद दोषियों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।






