फर्रुखाबाद में न्याय का सख्त संदेश: महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने पर पति-देवरानी को 5 साल की कैद
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संवाद 24 संवाददाता महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पति और देवरानी को दोषी करार दिया है। जनपद न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला थाना कंपिल क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर पलनापुर का है। अभियोजन के अनुसार, शाकिर अली ने छह नवंबर 2017 को पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि पांच नवंबर की रात उसकी बेटी का पति जहरुद्दीन, जेठ बबलू, देवर अशफाक उर्फ फन्नू और देवरानी काढ़ी उर्फ रुकसाना से विवाद हुआ था। आरोप था कि उसी रात महिला की हत्या कर उसे रस्सी के सहारे छप्पर में लटका दिया गया।
पुलिस ने प्रारंभ में हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या की धारा हटाते हुए मामला आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में परिवर्तित कर दिया गया। जांच में जेठ बबलू और देवर अशफाक की संलिप्तता नहीं पाई गई, जिसके चलते उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया।
विवेचक ने 15 मार्च 2018 को पति जहरुद्दीन और देवरानी काढ़ी उर्फ रुकसाना के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
अदालत के इस फैसले को घरेलू उत्पीड़न और महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है, ताकि ऐसे मामलों में प्रभावी रोक लगाई जा सके।






