सरकारी बीमा योजनाओं पर सवाल: फर्रुखाबाद में पशुपालकों को क्यों नहीं मिल रहा लाभ

संवाद 24 संवाददाता। फसल बीमा में सामने आए घोटालों के बाद अब जनपद में पशु बीमा योजना पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पशुपालकों का आरोप है कि बीमा कराने के बावजूद पशुओं की मृत्यु होने पर उन्हें क्लेम का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इससे सरकार की पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की मंशा पर असर पड़ता दिख रहा है।

जनपद फर्रुखाबाद में इस वर्ष अब तक 14 ऐसे पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनका विधिवत बीमा कराया गया था। पशुपालकों ने तय प्रक्रिया के तहत बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन सभी मामलों में बीमा कंपनी ने आवेदन निरस्त कर ‘नो क्लेम’ की रिपोर्ट भेज दी। इसके चलते पशुपालक लगातार मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

सरकार द्वारा गोवंश की नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से पशु बीमा योजना लागू की गई है। योजना के तहत पशु की आकस्मिक मृत्यु होने पर पशुपालक को आर्थिक क्षति से उबरने में सहायता मिलनी चाहिए। जनपद में इस समय लगभग दो हजार पशुओं का बीमा कराया गया है और नियमानुसार बीमा के 21 दिन बाद पशु की मृत्यु होने पर क्लेम का प्रावधान है।

पशुपालकों के अनुसार बीमा कंपनी के कर्मचारियों को समय से सूचना दी गई। इसके बाद सर्वे कराया गया, पशु की फोटो ली गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए गए। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने सभी दावों को नियमों का हवाला देकर खारिज कर दिया। पशुपालकों का कहना है कि उन्होंने टैगिंग, नियमित टीकाकरण और बीमारी की स्थिति में इलाज जैसी सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं।

योजना के तहत गाय के लिए 60 हजार रुपये और भैंस के लिए 70 हजार रुपये तक क्लेम निर्धारित है, लेकिन किसी भी पशुपालक को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। विभागीय रिकार्ड के अनुसार जिन 14 पशुपालकों को क्लेम नहीं मिला, उनमें रामदास, ओमप्रकाश, अखिलेश कुमार, मुन्नू सिंह, रामवीर, आरती, नन्हीं देवी, आदर्श कुमार, विजय प्रकाश, सुमंगल दीक्षित, आदित्य पांडेय, मंजू देवी और प्रतिमा मिश्रा शामिल हैं।

बीमा कंपनी से जुड़े एजेंटों का कहना है कि उन्हें प्रति बीमा बेहद कम कमीशन मिलता है और उनके द्वारा भेजे गए क्लेम आवेदन भी निरस्त कर दिए गए। वहीं पशुपालकों में बढ़ती नाराजगी के चलते पशु चिकित्सकों पर भी दबाव बढ़ रहा है, जिन्हें लोग बीमा क्लेम दिलाने के लिए घेर रहे हैं

पशुपालन विभाग का कहना है कि टीकाकरण की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर फीड की जाती है और बीमा क्लेम न मिलने के कारणों की जांच की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बीमा कंपनी के अधिकारियों को बुलाकर बातचीत की जाएगी, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और पात्र पशुपालकों को उनका हक दिलाया जा सके।

Anuj Singh
Anuj Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News