वकील से बर्बरता पर सख़्त फैसला: दारोगा–सिपाही को 10-10 साल की सज़ा, 50-50 हज़ार जुर्माना
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संवाद 24 संवाददाता। अधिवक्ता के साथ मारपीट, जबरन चोटी काटने और लूट की सनसनीखेज़ घटना में अदालत ने पुलिसिया ज्यादती पर कड़ा संदेश दिया है। विशेष न्यायालय ने मामले में दोषी पाए गए तत्कालीन चौकी प्रभारी दारोगा और एक सिपाही को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर कलां निवासी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा से जुड़ा है। अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में दायर याचिका के अनुसार, 10 जनवरी 2018 को कर्नलगंज चौकी पर तैनात तत्कालीन चौकी प्रभारी ने एक निजी विवाद के सिलसिले में उन्हें चौकी बुलाया था। अधिवक्ता अपने दो साथियों के साथ जब चौकी पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी।
याचिका में आरोप है कि विरोध करने पर अधिवक्ता और उनके साथियों के साथ मारपीट की गई। पुलिसकर्मियों ने जबरन उनकी चोटी काट दी, जेब में रखी नकदी छीन ली और मोबाइल फोन तोड़ दिए। सिम कार्ड भी गायब कर दिए गए। घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का रुख किया।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र/तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। 14 जनवरी को दोष सिद्ध होने के बाद शुक्रवार को सज़ा पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने दोनों दोषियों को 10-10 साल की कठोर सज़ा सुनाते हुए अर्थदंड भी लगाया।
इस फैसले को पुलिस जवाबदेही और कानून के समक्ष समानता की दिशा में एक अहम नज़ीर माना जा रहा है। अदालत के इस सख़्त रुख से स्पष्ट है कि वर्दी की आड़ में की गई किसी भी बर्बरता को बख्शा नहीं जाएगा।






