सत्यापन के दौरान बीएलओ मांग सकेंगे मूल प्रपत्र, जांच के बाद लौटाए जाएंगे दस्तावेज
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संवाद 24 संवाददाता। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद अब सत्यापन और नोटिस की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के तहत प्रतिदिन अधिकतम 150 नोटिस जारी किए जा सकेंगे। किसी भी व्यक्ति को अधिकतम तीन बार नोटिस भेजकर बुलाने का प्रावधान रहेगा। नोटिस पाने वाले व्यक्ति का नाम, उसके संबंध का विवरण तथा प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों का रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर अभियान के दौरान वर्ष 1985 से पहले जन्मे व्यक्तियों को अपने माता-पिता या अन्य नजदीकी संबंधियों का ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) नंबर दर्ज करना अनिवार्य था। वहीं, 1985 के बाद जन्मे व्यक्तियों को पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड अथवा निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 13 दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एआरओ (सहायक रिटर्निंग ऑफिसर) और आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर) को दंडाधिकारी नामित किया गया है, जहां नागरिक अपनी आपत्तियां या अपील दर्ज करा सकते हैं।
महत्वपूर्ण रूप से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) सत्यापन के दौरान नागरिकों से मूल प्रपत्र (ओरिजनल डॉक्यूमेंट) देखने के लिए मांग सकते हैं। हालांकि, जांच के बाद दस्तावेज तुरंत संबंधित व्यक्ति को वापस कर दिए जाएंगे, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर नोटिस का जवाब दें, आवश्यक दस्तावेज साथ रखें और सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें, ताकि मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सके।






