कटरी धर्मपुर में सैकड़ों शीशम के पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, वन विभाग की लापरवाही उजागर DFO बोले जिम्मेदारों से तलब होगा जवाब
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संवाद 24 संवाददाता। फर्रुखाबाद जिले के कटरी धर्मपुर वन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों पर करारा प्रहार हुआ है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए सैकड़ों बेशकीमती शीशम के पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक आंख मूंदे बैठे रहे। कटे हुए पेड़ों की जड़ें आज भी मौके पर मौजूद हैं, जो इस बड़े वन अपराध की खुली गवाही दे रही हैं।
शहर से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित कटरी धर्मपुर का यह वन क्षेत्र करीब 1500 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहां वन विभाग की ओर से वर्षों से शीशम, फाइकस, बेजीना, कदम और नीम जैसी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जा रहा था। वर्ष 2017 में ही इस क्षेत्र में लगभग 600 पौधे लगाए गए थे, जो अब 25 से 30 फीट ऊंचे विशाल पेड़ों का रूप ले चुके थे।
इन लाखों रुपये कीमत के पेड़ों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के कर्मचारी तैनात थे, इसके बावजूद सैकड़ों शीशम के पेड़ों का कटान होना गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत और घोर लापरवाही के बिना संभव नहीं है। कटे पेड़ों की मोटाई एक से दो फीट तक बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पेड़ काटने के बाद उनकी जड़ें तक नहीं निकाली गईं। जमीन में खड़ी एक से दो फीट ऊंची जड़ें इस बड़े घोटाले की मूक गवाह बनी हुई हैं।
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस तरह खुलेआम वन संपदा का नुकसान होना पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। वन क्षेत्र में हुए इस बड़े पैमाने के कटान से न सिर्फ हरित आवरण को भारी क्षति पहुंची है, बल्कि सरकार की पर्यावरणीय नीतियों पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
मामले के सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए हैं। डीएफओ ने कहा है कि मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनसे जवाब तलब कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले थमने वाले नहीं हैं।
कटरी धर्मपुर का यह मामला न केवल वन विभाग की कार्यशैली को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि संरक्षण के नाम पर लगाए गए पेड़ कितने सुरक्षित हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद कार्रवाई जमीन पर दिखाई देती है या मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाता है।






