उर्स में ताजमहल देखने का सुनहरा अवसर: तीन दिन निःशुल्क प्रवेश, खुलेंगीं शाहजहां मुमताज की असली कब्रें
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा में इतिहास, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा। मुगल शहंशाह शाहजहां का तीन दिवसीय उर्स 15 से 17 जनवरी तक ताजमहल में मनाया जाएगा। इस खास मौके पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को न केवल ताजमहल में निश्शुल्क प्रवेश मिलेगा, बल्कि तहखाने में स्थित शाहजहां और मुमताज महल की असली कब्रों के दीदार का दुर्लभ अवसर भी मिलेगा। वर्ष में केवल शाहजहां के उर्स के दौरान ही ये कब्रें आम लोगों के लिए खोली जाती हैं।
इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के रजब माह की 25, 26 और 27 तारीख को मनाए जाने वाले इस उर्स की शुरुआत 15 जनवरी को दोपहर दो बजे गुस्ल की रस्म से होगी। इसमें दोनों कब्रों को सुगंधित जल से स्नान कराया जाएगा। इसके साथ ही कुरानख्वानी, मिलादुनबी और मुशायरे का आयोजन होगा, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बनेगा।
16 जनवरी को दोपहर दो बजे संदल की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें कब्रों पर चंदन का लेप लगाया जाएगा। दिनभर मुख्य मकबरे में कब्बाली की गूंज श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराएगी।
उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण 17 जनवरी को होने वाली चादरपोशी की रस्म रहेगी। सुबह कुलशरीफ और कुरानख्वानी के बाद फातिहा पढ़ी जाएगी। इसके बाद दिनभर कब्रों पर चादरें और पंखे चढ़ाए जाएंगे। फोरकोर्ट में लंगर का भी आयोजन होगा, जहां श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
उर्स के पहले और दूसरे दिन दोपहर दो बजे से ताजमहल बंद होने तक, जबकि तीसरे दिन सुबह से शाम तक तहखाने में स्थित शाहजहां और मुमताज की कब्रें खुली रहेंगी। इन्हीं कब्रों पर उर्स की सभी रस्में अदा की जाती हैं। इस दौरान भारतीय और विदेशी दोनों तरह के पर्यटकों को स्मारक में
निशुल्क प्रवेश की सुविधा दी जाएगी।
उधर, उर्स कमेटी ताजमहल के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी ने एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा एस. कुमार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उर्स के दौरान दक्षिणी गेट को ताजमहल के बंद होने तक खुला रखा जाए। पिछले वर्ष शाम पांच बजे ही दक्षिणी गेट बंद कर दिए जाने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
कुल मिलाकर, शाहजहां का उर्स न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह ताजमहल को एक अलग ही रूप में देखने का अवसर भी देता है। अगर आप ताजमहल को निश्शुल्क देखना और उसके इतिहास के सबसे निजी पक्ष—शाहजहां और मुमताज की असली कब्रों—के दर्शन करना चाहते हैं, तो 15 से 17 जनवरी के बीच आगरा का कार्यक्रम बनाना यादगार साबित हो सकता है।






