हाईटेक कृषि की ओर यूपी: ड्रोन, एआई और प्रिसीजन फार्मिंग से किसानों का बदलता भविष्य

संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश में खेती अब केवल परंपरागत मेहनत का काम नहीं रह गई है, बल्कि यह तेज़ी से तकनीक आधारित उद्योग का रूप ले रही है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रिसीजन फार्मिंग और स्मार्ट सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकें किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। इन नवाचारों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कम लागत में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण

तीनों लक्ष्य एक साथ पूरे हो रहे हैं।
आगरा के आरबीएस कॉलेज कृषि संकाय, बिचपुरी के शस्य विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजवीर सिंह के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों का मूल उद्देश्य संसाधनों का कुशल उपयोग और किसानों की आय में वृद्धि है। उनका कहना है कि खेती अब वैज्ञानिक सोच और डिजिटल डेटा पर आधारित हो रही है, जहां निर्णय अनुभव के साथ-साथ तकनीकी विश्लेषण से लिए जा रहे हैं।

प्रिसीजन फार्मिंग: सटीकता से बढ़ती उपज – डिजिटल क्रांति के दौर में प्रिसीजन फार्मिंग खेती की रीढ़ बनती जा रही है। सेंसर, सैटेलाइट और डेटा एनालिटिक्स के जरिए मिट्टी की सेहत, नमी, तापमान और फसल वृद्धि की सटीक जानकारी मिलती है। इससे उर्वरक, पानी और कीटनाशकों का इस्तेमाल केवल उतना ही होता है, जितनी वास्तविक आवश्यकता हो। नतीजा—खर्च में कमी, उत्पादन में बढ़ोतरी और मिट्टी व जल संसाधनों का संरक्षण।

ड्रोन और कृषि रोबोट: समय, श्रम और जोखिम में कमी
ड्रोन तकनीक ने खेतों की निगरानी और फसल प्रबंधन को आसान बना दिया है। ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव, पोषक तत्व प्रबंधन, रोग पहचान और सिंचाई का आकलन तेज़ी से हो रहा है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है। वहीं कृषि रोबोट मृदा नमूना संग्रह, बीज बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई और छंटाई जैसे कार्य कर रहे हैं। इससे मानव श्रम पर निर्भरता घटने के साथ-साथ जोखिम भरे कार्य भी सुरक्षित हो रहे हैं।

‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना: तकनीक से सशक्त होती महिलाएं
प्रो. राजवीर सिंह के अनुसार ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ने की दूरदर्शी पहल है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे न केवल आधुनिक खेती में भागीदार बन रही हैं, बल्कि आय के नए स्रोत भी विकसित कर रही हैं। योजना के तहत ड्रोन की लागत पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है।

एआई, जीआईएस और आईओटी: स्मार्ट खेती की नींव
कृषि में एआई के उपयोग से मौसम पूर्वानुमान, रोग-कीट पहचान और फसल प्रबंधन पहले से अधिक सटीक हो गया है। जीआईएस और रिमोट सेंसिंग तकनीक मिट्टी, जल उपलब्धता और आपदा निगरानी में मदद कर रही है। वहीं आईओटी आधारित सेंसर रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराते हैं, जिससे सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन वैज्ञानिक ढंग से किया जा रहा है। इससे पानी की बचत, लागत में कमी और फसल की गुणवत्ता में सुधार संभव हुआ है।

खेती का नया भविष्य – हाईटेक कृषि न केवल किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि खेती को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी बना रही है। उत्तर प्रदेश में तेजी से अपनाई जा रही ये तकनीकें संकेत दे रही हैं कि आने वाले समय में किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी-सक्षम उद्यमी होंगे। यही बदलाव भारतीय कृषि के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की नींव रख रहा है।

Samvad 24 Office
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