बंद आरोग्य मंदिर और फ्लोराइड युक्त पानी: आगरा के एक गांव की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था
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संवाद 24 संवाददाता। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे आयुष्मान भारत और हर घर गंगाजल भले ही कागजों पर चमक रही हों, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी हकीकत अक्सर निराशाजनक होती है। आगरा जिले के बिचपुरी ब्लॉक स्थित मोहम्मदपुर गांव इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां दो साल से आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर ताला लटका हुआ है, जबकि ग्रामीण फ्लोराइड से दूषित भूजल पीने को मजबूर हैं। इससे दांतों, हड्डियों और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
हाल ही में गांव के होलिका स्थल पर समाजसेवी चौधरी लाखन सिंह की अध्यक्षता में हुई ग्रामीणों की बैठक में स्वास्थ्य, पेयजल और सीवर व्यवस्था पर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही की कड़ी निंदा की और तत्काल समाधान की मांग उठाई। चौधरी लाखन सिंह ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तीन साल पहले गांव में आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भव्य निर्माण हुआ था। शुरुआती दिनों में कुछ सेवाएं चलीं, लेकिन जल्द ही सब ठप हो गया। अब दो साल से यह केंद्र पूरी तरह बंद पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) की तैनाती दिखाई जाती है, लेकिन वह कभी नियमित रूप से नहीं आता। नतीजतन, मामूली बीमारी के लिए भी लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रमुख सचिव से सीधी शिकायत करेंगे।
सीवर लाइन की बर्बादी और पेयजल संकट
बैठक में कृष्णचंद गोपाल ने सीवर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। गांव में करीब 20 साल पहले सीवर लाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक इसे चालू नहीं किया गया। इससे न केवल ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है, बल्कि सरकारी धन की भारी बर्बादी भी हुई है। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पेयजल की स्थिति और भी विकट है। ‘हर घर गंगाजल’ योजना के तहत गांव में अब तक गंगा का स्वच्छ जल नहीं पहुंच सका। मजबूरी में लोग फ्लोराइड युक्त भूजल पर निर्भर हैं। आगरा के कई ग्रामीण इलाकों में भूजल में फ्लोराइड की अधिकता एक पुरानी समस्या है, जो हड्डियों को कमजोर करने और दांतों को पीला करने वाली बीमारियों का कारण बनती है। ग्रामीणों ने खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत की भी मांग की।
प्रशासन का पक्ष
ग्राम सचिव कविता सिंह ने बताया कि गांव में चार टीटीएसपी टंकियां कार्यरत हैं। जिन हैंडपंपों की दूरी इन टंकियों से 50 मीटर से अधिक है, उन्हें चिह्नित कर मरम्मत कराई जाएगी। वहीं, सीएचसी बिचपुरी के अधीक्षक डॉ. राजवीर सिंह ने स्वीकार किया कि वर्तमान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर में किसी सीएचओ की तैनाती नहीं है। पूर्व सीएचओ ने नौकरी छोड़ दी थी। उच्च अधिकारियों को सूचित कर नई भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।
योजनाएं बनाम हकीकत
यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी पर बड़ा सवाल उठाता है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्र ग्रामीणों को घर के पास प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बनाए गए थे, लेकिन स्टाफ की कमी और रखरखाव के अभाव में कई जगह ये बंद पड़े हैं। इसी तरह हर घर गंगाजल योजना से स्वच्छ पेयजल का वादा किया गया, मगर कई गांवों में अभी भी दूषित पानी ही उपलब्ध है।
ग्रामीणों की उम्मीद अब भी बाकी है कि उनकी पुकार प्रशासन तक पहुंचेगी। बंद पड़े आरोग्य मंदिर के दरवाजे खुलेंगे और स्वच्छ पानी की धारा गांव तक बह निकलेगी। तभी ये महत्वाकांक्षी योजनाएं सच्चे अर्थों में सफल होंगी। अन्यथा, कागजी सफलता की चमक जमीनी बदहाली को छिपा नहीं पाएगी।






