14 साल बाद सामने आया फर्जीवाड़ा: सेंट जॉन्स कॉलेज की शिक्षिका बर्खास्त
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित प्रतिष्ठित सेंट जॉन्स कॉलेज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कॉलेज की बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. विधु ग्रेस नोइल को 14 वर्षों तक सेवा देने के बाद बर्खास्त कर दिया गया है। आरोप है कि वर्ष 2011 में नियुक्ति के समय उन्होंने 12वीं कक्षा की फर्जी अंकतालिका जमा की थी।
सेंट जॉन्स कॉलेज, जो डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध है, की प्रबंध समिति ने जांच के बाद यह कड़ा फैसला लिया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि डॉ. नोइल का चयन 2011 में हुआ था। नियुक्ति के दौरान उन्होंने सीबीएसई की 12वीं कक्षा की प्रथम श्रेणी की स्व-प्रमाणित अंकतालिका प्रस्तुत की थी। लेकिन वर्ष 2024 में कॉलेज के सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन विजय कुमार ने शिकायत की कि डॉ. नोइल 12वीं में अनुत्तीर्ण थीं और फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल की।
इस शिकायत पर कॉलेज ने तीन सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें प्रो. नमिता श्रीवास्तव, प्रो. सैमुअल जार्डन और प्रो. संजय जैन शामिल थे। प्रारंभिक जांच में अंकतालिका फर्जी पाई गई। इसके बाद प्रो. राजीव फिलिप को जांच अधिकारी बनाया गया। 24 मार्च 2025 को उनकी रिपोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के अनुमोदन से 19 सितंबर 2025 को प्रबंध समिति ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया।
हालांकि, उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज ने विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन डॉ. नोइल ने बर्खास्तगी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण आगे की कार्रवाई रुकी हुई है। प्राचार्य प्रो. सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से इस संबंध में राय मांगी गई है।
यह मामला शिक्षा जगत में दस्तावेजों की सत्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी अंकतालिकाओं के जरिए नौकरी हासिल करने के कई मामले सामने आ चुके हैं, जो योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन करते हैं। सेंट जॉन्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसा फर्जीवाड़ा लंबे समय तक छिपा रहना जांच एजेंसियों और कॉलेज प्रशासन की सतर्कता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।






