दरोगा ने महिला सिपाही को नौकरी सुचारू चलाने की रखी शर्मनाक शर्त
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी में छिपी एक काली सच्चाई सामने आई है। लोहामंडी सर्किल के एक थाने में तैनात एक दरोगा ने महिला सिपाही के साथ ऐसा व्यवहार किया कि पूरे थाने में हड़कंप मच गया। आरोप है कि दरोगा ने महिला सिपाही को प्रस्ताव दिया “दोस्ती कर लो, तो नौकरी ठीक से चलेगी।” यानी पद का दुरुपयोग कर न केवल मानसिक उत्पीड़न किया, बल्कि नौकरी पर दबाव बनाने की कोशिश की।
महिला सिपाही ने हिम्मत दिखाते हुए थाना प्रभारी से इसकी शिकायत की। शिकायत में बताया कि दरोगा उनकी हर गतिविधि पर नजर रखता था – थाने में आने-जाने का समय, अन्य सहकर्मियों से बातचीत, सब कुछ। यह निगरानी इतनी तीव्र थी कि महिला सिपाही मानसिक रूप से परेशान हो गईं। शिकायत के समय थाने में कुछ अन्य सिपाही भी मौजूद थे, जिन्होंने इस घटना को देखा-सुना।
थाना प्रभारी ने तुरंत एक्शन लिया। दरोगा को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी दी। इसके बाद से आरोपी दरोगा थाने में नजर नहीं आ रहा – कहा जा रहा है कि वह छुट्टी पर चला गया है। महिला सिपाही को आश्वासन दिया गया है कि उन्हें कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मामला ऊपर तक पहुंचा तो डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने स्पष्ट कहा – “अगर लिखित शिकायत मिलेगी, तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।” फिलहाल थाने में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। सहकर्मी चुपके-चुपके इस पर बात कर रहे हैं, लेकिन कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं।
यह घटना एक बार फिर पुलिस महकमे में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के मुद्दे को उजागर करती है। वर्दीधारी अगर खुद ही कानून की धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम जनता कैसे भरोसा करेगी? महिला पुलिसकर्मी पहले से ही चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करती हैं – ड्यूटी की कठिनाइयां, समाज की नजरें, और अब अपने ही विभाग में ऐसे ‘संरक्षक’ जो शिकारी बन बैठें।
ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि दोषी को सजा मिले और अन्य को सबक। उम्मीद है कि अगर लिखित शिकायत दर्ज होती है, तो जांच निष्पक्ष होगी और न्याय होगा। क्योंकि पुलिस की विश्वसनीयता ही समाज की सुरक्षा की गारंटी है।






