मानवता को झकझोर देने वाली घटना: आगरा में हाईवे किनारे झाड़ियों में मिला नवजात का शव
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संवाद 24 संवाददाता। ताजनगरी आगरा में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। सिकंदरा थाना क्षेत्र के रुनकता इलाके में हाईवे किनारे जाटव बस्ती के पास झाड़ियों में बुधवार को एक नवजात शिशु का शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। यह मासूम जिंदगी दुनिया में आते ही क्रूरता की शिकार हो गई। आखिर कौन हैं वो दरिंदे, जिन्होंने इस नन्ही जान को नाले या झाड़ियों में फेंक दिया? पुलिस अब इस रहस्य से पर्दा उठाने में जुटी है।
घटना की जानकारी मिलते ही रुनकता पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्राथमिक जांच में शिशु के जन्म के कुछ घंटों बाद ही उसे फेंके जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। शव की हालत देखकर ऐसा लगता है कि इसे जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई। इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। कई लोगों ने इसे अवैध संबंधों या सामाजिक कलंक से जोड़कर देखा, तो कुछ ने गरीबी और जागरूकता की कमी को इसका कारण बताया।
पुलिस जांच की कमान संभालते हुए हर संभव कोण से छानबीन कर रही है। जांच अधिकारी दरोगा नीलेश शर्मा ने बताया कि शव फेंकने वालों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। हालांकि, इलाके में कैमरों की संख्या कम होने से चुनौतियां आ रही हैं। इसके बावजूद पुलिस किसी भी सुराग को छोड़ना नहीं चाहती।
जांच के अन्य पहलू भी मजबूत किए गए हैं। नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों से हाल के दिनों में प्रसव कराने वाली महिलाओं का रिकॉर्ड मंगाया गया है। पीएचसी रुनकता से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी कर्मियों से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की जानकारी ली गई है। पुलिस का मानना है कि ये कदम जल्द ही किसी ठोस सुराग तक पहुंचा सकते हैं।
यह घटना न केवल एक अपराध है, बल्कि समाज के उस अंधेरे चेहरे को उजागर करती है जहां नवजातों को बोझ समझा जाता है। खासकर बेटियों के साथ ऐसी क्रूरता की खबरें आए दिन सुनाई देती हैं, जो कन्या भ्रूण हत्या और लिंग अनुपात की गिरती स्थिति की याद दिलाती हैं। क्या गरीबी, अशिक्षा या सामाजिक दबाव ऐसे कुकर्मों को जन्म दे रहे हैं? या फिर अवैध गर्भपात और संबंधों का परिणाम है।






