उधारी के 55 हजार पर अपहरण: जीजा-साले की गिरफ्तारी, पुलिस ने तीन घंटे में बचा लिया व्यापारी को
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संवाद 24 संवाददाता। छोटी सी उधारी की रकम वसूलने के लिए लोग कितने नीचे गिर सकते हैं, इसका ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश के हाथरस और आगरा में देखने को मिला। मात्र 55 हजार रुपये की उधारी नहीं चुकाने पर एक व्यापारी को दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया। अपहरण करने वाले कोई और नहीं, बल्कि उसी के सप्लायर—जीजा और साला—थे, जिन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर यह खतरनाक कदम उठाया। लेकिन पुलिस की तत्परता ने महज तीन घंटे में अपहृत व्यापारी को सकुशल मुक्त करा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
घटना बुधवार सुबह की है। हाथरस निवासी व्यापारी रवि कुलश्रेष्ठ सर्फ, साबुन और रोजमर्रा की वस्तुओं की सप्लाई का काम करते हैं। सुबह वह अपने काम पर निकले थे। औद्योगिक क्षेत्र में स्कॉर्पियो कार सवार कुछ लोगों ने उनकी बाइक रोकी और जबरन उन्हें कार में बैठाकर फरार हो गए। क्षेत्रवासियों ने यह नजारा देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को सड़क पर रवि की बाइक पड़ी मिली। जांच से पता चला कि यह अपहरण का मामला है। रवि के भाई आकाश ने हाथरस गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी कर दी। सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से अपहरणकर्ताओं की कार की लोकेशन ट्रेस की गई। पता चला कि वे अपहृत को आगरा के रुनकता क्षेत्र के सींगना गांव की ओर ले जा रहे हैं। हाथरस पुलिस ने सिकंदरा पुलिस को सूचना दी। दोनों टीमों ने मिलकर घेराबंदी की—हाथरस पुलिस पीछे से और सिकंदरा पुलिस आगे से। शाम होते-होते कार को रोक लिया गया और रवि को सकुशल बरामद कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में सींगना निवासी उमेश सिंह और उनका साला सोनवीर मुख्य हैं, जो साथ मिलकर सर्फ-साबुन का कारोबार चलाते हैं। उनके साथ बरेली के भंगेडी गांव का अंकित उर्फ सुमित और एक नाबालिग भी पकड़ा गया। पूछताछ में उमेश और सोनवीर ने कबूल किया कि चार महीने पहले उन्होंने रवि को 55 हजार रुपये का माल उधार दिया था। बदले में रवि ने जो चेक दिया, वह बाउंस हो गया। बार-बार मांगने पर भी पैसे नहीं मिले तो गुस्से में उन्होंने अपहरण की साजिश रची।
हाथरस के एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि रवि कुलश्रेष्ठ के खिलाफ अन्य व्यापारियों से उधार लेकर पैसे न लौटाने के आरोप में विभिन्न थानों में 12 मुकदमे दर्ज हैं। कई मामलों में गैर-जमानती वारंट भी जारी हैं। यह खुलासा मामले को और जटिल बनाता है—एक तरफ उधार न चुकाने की आदत, दूसरी तरफ वसूली के लिए अपहरण जैसे अपराध।
सिकंदरा के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने कहा कि हाथरस पुलिस की सूचना पर उनकी टीम तुरंत सक्रिय हुई और सफल ऑपरेशन किया। आरोपियों को हाथरस पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
यह घटना व्यापारिक लेन-देन में विश्वास की कमी को उजागर करती है। कानूनी रास्ते होने के बावजूद लोग हिंसा और अपराध का सहारा ले रहे हैं। पुलिस की मुस्तैदी सराहनीय है, जिसने एक बड़ा हादसा टलने नहीं दिया। लेकिन सवाल यह भी है कि छोटे-छोटे विवादों को इतना बड़ा रूप क्यों दिया जा रहा है? उम्मीद है कि न्यायालय इस मामले में सख्ती बरतेगा ताकि ऐसे अपराधों पर लगाम लगे।






