आलीशान जीवनशैली, फिर भी फ्री राशन का लालच: अपात्रों का फर्जीवाड़ा उजागर

संवाद 24 संवाददाता। आज के दौर में सरकारी योजनाएं गरीबों और जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त राशन की व्यवस्था लाखों परिवारों को भूख से बचाने का काम कर रही है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस पवित्र योजना का दुरुपयोग भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। एक जिले में हुई जांच ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं – आलीशान कोठियां, लग्जरी कारें, कई बाइकें और अच्छी-खासी कमाई वाले हजारों लोग फ्री राशन का लाभ उठा रहे हैं।

जिला आपूर्ति विभाग की जांच में पता चला है कि जिले में कुल 7,34,876 राशन कार्ड धारक हैं, जिनमें से 92,119 लोग अपात्र पाए गए हैं। ये लोग या तो उच्च आय वर्ग के हैं, या उनके पास चार पहिया वाहन हैं, या फिर पांच एकड़ से ज्यादा जमीन। फिर भी वे अंत्योदय या पात्र गृहस्थी श्रेणी में राशन कार्ड बनवाकर मुफ्त गेहूं-चावल ले रहे थे। विभाग ने 18 विभिन्न विभागों से डेटा क्रॉस-चेक किया, जिसमें वाहन पंजीकरण, आयकर रिटर्न, जमीन रिकॉर्ड और व्यवसाय टर्नओवर जैसी जानकारी शामिल थी।

अपात्रों की श्रेणियां: चौंकाने वाले आंकड़े
ग्रामीण क्षेत्र में 2 लाख से ज्यादा सालाना आय वाले: 36,501
शहरी क्षेत्र में 3 लाख से ज्यादा आय वाले: 17,476
25 लाख से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायी: 130
स्वरोजगार चलाने वाले: 2,099
चार पहिया वाहन मालिक: 11,522 (हल्के मोटर वाहन)
पांच एकड़ से ज्यादा जमीन वाले: 4,630
लंबे समय से राशन न उठाने वाले (जो संभवतः अपात्र हैं): 15,032
अन्य राज्यों या जिलों के कार्डधारक: 4,335
ये आंकड़े बताते हैं कि कैसे अमीर और सक्षम लोग गरीबों का हक मार रहे हैं। एक तरफ जहां असली जरूरतमंद को पूरा राशन नहीं मिल पाता, वहीं ये अपात्र लोग फ्री का अनाज उठाकर सरकारी खजाने पर बोझ बन रहे हैं।

राशन कार्ड की पात्रता नियम: क्या कहता कानून?
भारत में राशन कार्ड दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
अंत्योदय अन्न योजना (AAY): सबसे गरीबों के लिए – अनाथ, दिव्यांग, निराश्रित विधवा, लंबी बीमारी से पीड़ित आदि को प्राथमिकता। इन्हें प्रति कार्ड 35 किलो अनाज मुफ्त (21 किलो चावल + 14 किलो गेहूं)।
पात्र गृहस्थी (PHH): सामान्य गरीब परिवार। शहरी क्षेत्र में सालाना आय 3 लाख से कम, ग्रामीण में 2 लाख से कम। साथ ही:
चार पहिया वाहन नहीं होना चाहिए।
5 किलोवाट से ज्यादा जनरेटर नहीं।
परिवार में सरकारी नौकरी नहीं।
5 एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं।
इन नियमों का उल्लंघन करके कार्ड बनवाना न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि गरीबों के साथ अन्याय भी।

अब सख्त कार्रवाई का समय
जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि तहसील स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। सभी 92,119 संदिग्धों की घर-घर जांच होगी। दोषी पाए जाने पर कार्ड निरस्त किए जाएंगे और वसूली की जाएगी। इतना ही नहीं, फर्जी वेरिफिकेशन करने वाले विभागीय कर्मचारियों पर भी जांच और कार्रवाई होगी। यह कदम सराहनीय है, क्योंकि फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचना जरूरी है।

यह घटना पूरे देश के लिए एक सबक है। कई राज्यों में इसी तरह के अभियान चल रहे हैं – बिहार में लाखों नाम कटे, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में फर्जी आधार से बने कार्ड पकड़े गए। सरकार को चाहिए कि डिजिटल वेरिफिकेशन को और मजबूत बनाए, आधार लिंकिंग अनिवार्य करे और नियमित ऑडिट करवाए।

अंत में, अपील है उन लोगों से जो अपात्र होकर भी लाभ ले रहे हैं – स्वयं आगे आकर कार्ड सरेंडर करें। यह न केवल कानूनी रूप से सही है, बल्कि नैतिक दृष्टि से भी जरूरी। असली गरीब का हक कोई नहीं मार सकता। सरकारी योजनाएं गरीबों की हैं, अमीरों की नहीं। इस अभियान से उम्मीद है कि खाद्य सुरक्षा योजना और पारदर्शी व प्रभावी बनेगी।

Deepak Singh
Deepak Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News