बांग्लादेश की अशांति की आंच आगरा के जूता उद्योग तक पहुंची: 100 करोड़ का निर्यात ठप, उद्यमी चिंतित

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संवाद 24 संवाददाता। विश्व प्रसिद्ध जूता नगरी आगरा के उद्यमियों के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ ने निर्यात को झटका दिया, अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक अशांति और हिंसा ने आगरा के जूता एवं कंपोनेंट कारोबार को गहरा असर डाला है। आगरा से बांग्लादेश जाने वाला सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक का जूता और कंपोनेंट निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। उद्यमी माल भेजने से कतरा रहे हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

बांग्लादेश में दिसंबर 2025 में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़की हिंसा ने पूरे देश को अस्थिर कर दिया है। ढाका सहित कई शहरों में प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इस अशांति के कारण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा है। आगरा के जूता उद्यमी बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर सोल, टीपीआर ग्रेन्यूल, एडहेसिव और अन्य कंपोनेंट सप्लाई करते हैं। वहां सस्ती मजदूरी और निर्माण लागत के कारण कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांडेड कंपनियां जूते बनवाती हैं, जिनके लिए आगरा से कंपोनेंट की भारी मांग रहती है। इसके अलावा चीन ने भी बांग्लादेश में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं, जो ‘मेड इन चाइना’ से परहेज करने वाले खरीदारों को आकर्षित करती हैं।

जूता कंपोनेंट निर्यातक सुनील नोतनानी कहते हैं, “अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने से पहले से ही हमारा निर्यात प्रभावित था। अब बांग्लादेश का यह छोटा सा संकट भी हमें बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। माल भेजना जोखिम भरा हो गया है।” इसी तरह इंडियन फुटवियर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव दीपक मनचंदा बताते हैं, “आगरा, कानपुर, चेन्नई और एनसीआर से बांग्लादेश बड़े पैमाने पर कंपोनेंट जाता है। वहां निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन हिंसा के कारण आपूर्ति रुक गई है। नामी कंपनियां भी प्रभावित हैं।”

निर्यातक आशीष जैन का कहना है, “अमेरिकी टैरिफ के बाद हम यूरोपीय देशों जैसे नए बाजार तलाश रहे थे, लेकिन बांग्लादेश का यह संकट सब कुछ बिगाड़ रहा है। जूते और कंपोनेंट दोनों का कारोबार ठप है।” आगरा का जूता उद्योग पहले से ही वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहा है। अमेरिका द्वारा 2025 में कई देशों पर ऊंचे टैरिफ लगाने से भारतीय निर्यात महंगा हो गया, जबकि बांग्लादेश जैसे देशों को कुछ राहत मिली। लेकिन अब वहां की अस्थिरता ने आगरा के उद्यमियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

उद्योग जगत का मानना है कि बांग्लादेश में स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ेगा। हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है। उद्यमी सरकार से अपील कर रहे हैं कि नए बाजारों की तलाश और निर्यात प्रोत्साहन में मदद की जाए। फिलहाल, सभी की निगाहें बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर टिकी हैं, जहां चुनाव से पहले शांति बहाली की उम्मीद की जा रही है।

यह संकट आगरा के जूता उद्योग के लिए एक और परीक्षा है, जो वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।

Deepak Singh
Deepak Singh

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