आगरा: ग्वालियर हाईवे पर किसानों का अनोखा प्रदर्शन, सुंदरकांड पाठ से गूंजा रोहता चौराहा
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के आगरा में ग्वालियर हाईवे के रोहता चौराहे पर सोमवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले दर्जनों किसान सड़क किनारे बैठकर सुंदरकांड का सामूहिक पाठ कर रहे थे। यह प्रदर्शन न केवल शांतिपूर्ण था, बल्कि आध्यात्मिकता से भरा हुआ था, जहां हनुमान जी की भक्ति के माध्यम से किसानों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा।
यह प्रदर्शन सात सूत्रीय मांगों को लेकर किया गया था। किसानों का कहना है कि इन मांगों पर पहले भी आश्वासन मिले थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
बिजली छूट योजना में किसानों को पूरा लाभ दिया जाए।
इनर रिंग रोड निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। 12 फरवरी 2025 को पावर ग्रिड से प्रभावित किसानों को सोलर प्लांट लगवाकर मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।
निराश्रित गोवंश (आवारा पशुओं) से फसलों को होने वाले नुकसान पर रोक लगाई जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।
गेहूं, आलू और सरसों जैसी मुख्य फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
यूरिया खाद की कमी दूर की जाए और किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जाए।
अन्य संबंधित समस्याओं का समाधान, जैसे कि पुरानी योजनाओं का क्रियान्वयन।
प्रदर्शन स्थल पर किसान सुंदरकांड पाठ में लीन थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यह अनोखा तरीका अपनाकर किसानों ने अपनी मांगों को न केवल प्रशासन तक पहुंचाया, बल्कि आमजन का ध्यान भी आकर्षित किया।
इस दौरान मौके पर एसीपी सदर इमरान अहमद और नायब तहसीलदार सदर रजनीश रंधावा पहुंचे। उन्होंने किसानों से विस्तार से चर्चा की और उनकी शिकायतों को सुना। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मांगों पर विचार किया जाएगा और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे।
प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष दीपक तोमर, कन्हैया शर्मा, जसपाल सिंह, प्रज्वल कुलश्रेष्ठ, हर्षित, प्रधान शिव सिंह तोमर, बृजमोहन प्रधान अविनाश सहित कई किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। किसानों का कहना था कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह प्रदर्शन किसानों की बढ़ती निराशा को दर्शाता है। एक ओर जहां वे अपनी फसलों और आजीविका की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं भक्ति के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखकर उन्होंने एक मिसाल कायम की है। उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इन जायज मांगों पर अमल करेगा, ताकि किसानों का विश्वास बहाल हो सके।






