आगरा में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा: वरदान मेडिकल एजेंसी पर औषधि विभाग की कार्रवाई

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संवाद 24 संवाददाता। ताजनगरी में एक बार फिर दवा बाजार में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। फव्वारा चौक स्थित वरदान मेडिकल एजेंसी पर औषधि विभाग की टीम ने लगातार तीसरे दिन छापेमारी की। जांच में बड़ी अनियमितताएं मिलीं, जिसमें सरकारी अस्पतालों की दवाएं निजी मेडिकल स्टोर पर बिक्री के लिए पाई गईं। विभाग ने 8 लाख रुपये से अधिक कीमत की दवाओं को सीज कर दिया है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय के अनुसार, जांच की शुरुआत नकली और सरकारी दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत पर हुई। औषधि निरीक्षक कपिल शर्मा और दीपक कुमार की टीम ने एजेंसी के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की। इसमें 28 प्रकार की दवाओं की खरीद-बिक्री में गड़बड़ी सामने आई। खास तौर पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दर्द निवारक दवाओं के 23 प्रकारों के बिल ही नहीं मिले। इनमें से पांच कार्टन दवाएं जब्त की गईं, जिनकी अनुमानित कीमत 8 लाख रुपये से ज्यादा है।


कंप्यूटर रिकॉर्ड और स्टॉक के मिलान में भी पांच दवाओं के मामले में अंतर पाया गया। विभाग ने इनके बिल तलब करने के लिए नोटिस जारी किया है। जांच को और मजबूत बनाने के लिए दर्द, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की छह दवाओं के नमूने लैब भेजे गए हैं। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी सरकारी दवा और खून बढ़ाने वाले इंजेक्शन के नमूने लिए गए थे।


ईएसआई अस्पताल की दवाएं मिलीं, चोरी की आशंका
सबसे गंभीर खुलासा कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) अस्पताल की एंटीबायोटिक दवाओं का है। एजेंसी से करीब 1300 टैबलेट बरामद हुईं, जिन्हें सीज कर लिया गया। पूछताछ में संचालक अंकुर अग्रवाल ने दावा किया कि ये दवाएं ग्वालियर से हॉकरों से खरीदी गईं। हालांकि, विभाग इस दावे से संतुष्ट नहीं है। बैच नंबर सहित पूरी जानकारी शासन को भेज दी गई है। ईएसआई मुख्यालय से भी विवरण मांगा गया है, ताकि सरकारी दवाओं की चोरी या लीकेज की जांच आगे बढ़ सके।


यह मामला आगरा के दवा बाजार की पुरानी समस्याओं को फिर से उजागर करता है। पिछले वर्षों में यहां नकली दवाओं के बड़े रैकेट पकड़े गए हैं, जिसमें करोड़ों की दवाएं सीज हुईं। सरकारी दवाएं, जो मुफ्त या सब्सिडी पर मरीजों को दी जाती हैं, अगर बाजार में बिकने लगें तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि गरीब मरीजों के साथ धोखा भी है।


औषधि विभाग ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर बैच नंबर से चोरी साबित हुई तो संबंधित अस्पताल कर्मियों पर भी एफआईआर हो सकती है।市民ों से अपील है कि दवाएं केवल विश्वसनीय स्टोर से खरीदें और संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत विभाग को दें।


यह कार्रवाई दवा बाजार में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे मामले बार-बार क्यों सामने आ रहे हैं? क्या सिस्टम में कोई बड़ा गैप है, जिसे जल्द प्लग करने की जरूरत है?

Deepak Singh
Deepak Singh

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