एक्सक्लूसिव: कागजों में आईटीआई संस्थान, जमीन पर नदारद, फिर भी चल रही हैं परीक्षाएं

संवाद 24 संवाददाता। अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा (पूरक/सप्लीमेंट्री) की प्रयोगात्मक परीक्षाओं के दौरान आईटीआई संस्थानों की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में कंट्रोल रूम बनाए जाने के बावजूद फर्जी परीक्षा केंद्रों का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे संस्थानों को परीक्षा केंद्र घोषित किया गया है, जो कागजों में तो मौजूद हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है।

राष्ट्रीय छात्र परिषद के पदाधिकारी रौनक ठाकुर ने इस पूरे मामले की शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई है। उनका कहना है कि इससे पहले सालासर आईटीआई, दयालबाग को लेकर सवाल उठे थे, जिसका प्रशासनिक जांच में खुलासा भी हो चुका है। इसके बावजूद अब श्रीमती रूपनदेवी आईटीआई, बल्हैरा, बाबा साहेब आईटीआई और विनायक आईटीआई कॉलेज, अर्जुन नगर जैसे संस्थानों के नाम भी परीक्षा केंद्रों की सूची में शामिल पाए गए हैं, जबकि ये संस्थान जमीन पर संचालित ही नहीं हैं।

रौनक ठाकुर ने बताया कि इससे पहले आईटीआई बल्केश्वर के बाहर धरना-प्रदर्शन कर फर्जी संस्थानों की जांच की मांग उठाई गई थी। इस पर प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए एसीएम तृतीय से भौतिक सत्यापन कराया था, जिसमें साफ तौर पर यह सामने आया कि सालासर आईटीआई धरातल पर मौजूद ही नहीं है। इससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई थी। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा खुलासा होने के बावजूद न तो जांच को आगे बढ़ाया गया और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कॉलेज ही अस्तित्व में नहीं हैं, तो छात्र परीक्षा कहां दे रहे हैं? छात्रों के एडमिट कार्ड में भी इन फर्जी केंद्रों के नाम दर्ज हैं। इससे परीक्षा की शुचिता, छात्रों के भविष्य और पूरे व्यावसायिक शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राष्ट्रीय छात्र परिषद ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। साथ ही सभी घोषित परीक्षा केंद्रों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए और जिन अधिकारियों या संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इस संबंध में संयुक्त निदेशक (जेडी) आईटीआई डॉ. संजय सागर ने कहा कि कॉलेजों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। जहां भी जांच की आवश्यकता होगी, वहां जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित कॉलेजों को डी-एफिलिएट भी किया जाएगा।

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर फर्जीवाड़े की ओर भी इशारा करता है। अब देखना यह है कि जांच वास्तव में कितनी पारदर्शी होती है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News