घर का सामान तोड़ दिया था, उसी शॉट में दिख गया सपना, आईपीएल के सबसे महंगे अनकैप्ड खिलाड़ी बने कार्तिक शर्मा

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संवाद 24 संवाददाता। कभी घर में रखा बल्ला उठाकर एक ऐसा शॉट लगाया कि सामान टूट गया, और आज वही हाथ आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे अनकैप्ड खिलाड़ियों में शामिल हो गया। चेन्नई सुपर किंग्स द्वारा 14 करोड़ 20 लाख रुपये में खरीदे गए आगरा के युवा क्रिकेटर कार्तिक शर्मा की यह सफलता रातों-रात नहीं आई। इसके पीछे सालों का संघर्ष, परिवार के भीतर चली बहसें और पिता मनोज शर्मा का अटूट विश्वास छिपा है।

मनोज शर्मा अमर उजाला से बातचीत में उस दिन को याद करते हैं, जब कार्तिक महज तीन साल का था। “मैं खुद क्रिकेट खेलता था। घर में रखा बल्ला कार्तिक ने उठाया और पहली ही गेंद पर ऐसा शॉट मारा कि घर का काफी सामान टूट गया। उस पल मुझे लगा, इस बच्चे में कुछ खास है,” मनोज शर्मा बताते हैं। उसी दिन उन्होंने मन ही मन ठान लिया कि उनका बेटा क्रिकेटर बनेगा।

फैसले के खिलाफ खड़ा था परिवार

लेकिन यह सपना आसान नहीं था। मनोज शर्मा के अनुसार, जब उन्होंने कार्तिक को क्रिकेटर बनाने का फैसला लिया तो परिवार और रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। कार्तिक के दादाजी चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दे और किसी सरकारी नौकरी की राह पकड़े। दादाजी उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, “तब क्रिकेट में करियर इतना सुरक्षित नहीं लगता था। इसलिए पढ़ाई और सर्विस की बात सोची थी।” पर पिता का विश्वास डगमगाया नहीं। उन्होंने हर तर्क, हर दबाव के सामने बेटे के सपने को ढाल बनाकर खड़ा रखा।

अकादमी से मैदान तक का सफर

करीब पांच साल की उम्र में कार्तिक को आगरा की लोकेंद्र चाहर क्रिकेट अकादमी में दाखिल कराया गया। अनुभवी कोच लोकेंद्र चाहर की निगरानी में उसका खेल निखरता गया। नियमित अभ्यास, अनुशासन और सही मार्गदर्शन ने उसकी प्रतिभा को आकार दिया। सुबह की कड़ी ट्रेनिंग, पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन यह सब कार्तिक के जीवन का हिस्सा बन गया।

करोड़ों की बोली, संघर्ष की जीत

आईपीएल मिनी नीलामी में जब कार्तिक शर्मा पर 14.20 करोड़ रुपये की बोली लगी, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कामयाबी नहीं थी। यह उस पिता की जीत थी जिसने टूटे सामान में भविष्य देखा, उस कोच की मेहनत थी जिसने हुनर तराशा और उस परिवार की कहानी थी, जहां बहसों के बाद भी सपना जिंदा रहा।

आज कार्तिक शर्मा आगरा ही नहीं, देश के उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि विश्वास, संघर्ष और सही दिशा मिल जाए, तो टूटा हुआ सामान भी इतिहास बनाने की शुरुआत बन सकता है।

Deepak Singh
Deepak Singh

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