साइबर ठगी के जाल में पुलिस की चाल: खुद ठग बनकर तोड़ा देश-विदेश तक फैला सबसे बड़ा नेटवर्क
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संवाद 24 संवाददाता। साइबर अपराध की दुनिया जितनी हाईटेक है, उसे तोड़ने के लिए पुलिस को उतनी ही चतुराई दिखानी पड़ी। आगरा पुलिस ने दो महीने की खुफिया मेहनत, तकनीकी जांच और जोखिम भरी रणनीति के बाद साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 32 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सरगना दुबई में बैठा नेटवर्क चला रहा था।
इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड नितिन भगौर कभी आगरा में हलवाई की दुकान चलाया करता था। लेकिन साइबर ठगी की दुनिया में कदम रखते ही उसकी किस्मत रातों-रात बदल गई। ठगी से कमाए गए करोड़ों रुपये को सफेद करने के लिए उसने दुबई में मेडलर ग्लोबल एक्सीलेंस और मेडलर सर्विस ग्रुप के नाम से फर्जी कंपनियां खड़ी कर लीं। इन कंपनियों को आय का जरिया दिखाकर वह विदेश में ऐश की जिंदगी जी रहा था।
भारत में गैंग को संभालने और नए लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी नितिन ने अपने करीबी रवि राठौर को सौंप रखी थी। रवि, आगरा के ताजगंज क्षेत्र का रहने वाला है और वही स्थानीय स्तर पर खातों की व्यवस्था, सिम कार्ड और युवाओं को ट्रेनिंग दिलाने का काम देखता था। नितिन समय-समय पर भारत आता, युवाओं की परीक्षा लेता और मोटे वेतन व कमीशन का लालच देकर कंपनी के वीजा पर उन्हें दुबई ले जाता, जहां साइबर ठगी का सेंटर चलता था।
इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था। नितिन खुद किसी फोन नंबर, ई-मेल या बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी के लिए नहीं करता था। वह डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिए चुनिंदा लोगों से संपर्क रखता था। एनसीआरबी पर दर्ज एक शिकायत की जांच के दौरान पुलिस को प्रतिबिंब ऐप के जरिए एक संदिग्ध युवक का सुराग मिला। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह रवि राठौर और नितिन भगौर के लिए काम करता है।
इसके बाद पुलिस ने 200 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े बैंक खातों की बारीकी से जांच शुरू की। एक खाते से नितिन की दुबई स्थित कंपनी में रकम ट्रांसफर होने का सुराग मिला और यहीं से पूरी चेन खुलती चली गई। रविवार को 24 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई और सोमवार को गैंग के स्थानीय लीडर रवि राठौर भी पुलिस के शिकंजे में आ गया।
सबसे खास बात यह रही कि किसी निर्दोष को फंसने से बचाने के लिए पुलिस ने खुद को साइबर ठग बनाकर काम किया। पुलिसकर्मी खातों के खरीदार बनकर दलालों से मिले, जनसेवा केंद्र संचालकों से फर्जी दस्तावेज मांगे और ठगों की भाषा में ही उनसे सौदेबाजी की। इसी रणनीति ने पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।
एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार ने बताया कि दुबई में बैठे सरगना नितिन भगौर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के लिए सीबीआई को रिपोर्ट भेजी जाएगी। रवि राठौर से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं और गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
यह कार्रवाई न सिर्फ साइबर अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस की रणनीति और धैर्य के आगे टिक नहीं सकता।






