आगरा के गरीब किडनी मरीजों के लिए संजीवनी बनी निशुल्क डायलिसिस यूनिट, सैकड़ों की जिंदगी बची
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आगरा। आर्थिक रूप से कमजोर किडनी रोगियों के लिए अब जिला अस्पताल की निशुल्क हेमोडायलिसिस यूनिट जीवनदान बनकर उभरी है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित इस अत्याधुनिक यूनिट ने पिछले 10 महीनों में 726 मरीजों को कुल 8,712 बार मुफ्त डायलिसिस उपलब्ध कराकर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की नई मिसाल कायम की है। महंगे इलाज से जूझते गरीब परिवारों के लिए यह यूनिट उम्मीद की वह किरण बन गई है, जिसने हजारों जीवन बचाए और बड़ी आर्थिक राहत भी प्रदान की है।
PPP मॉडल पर चल रही यूनिट, मरीजों के लिए बनी बड़ी राहत
जिला अस्पताल में स्थापित यह डायलिसिस यूनिट आधुनिक मशीनों, प्रशिक्षित तकनीशियनों और बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं से लैस है। यहां इलाज पूरी तरह मुफ्त होने के कारण गरीब मरीजों को न तो प्राइवेट अस्पतालों के भारी बिल चुकाने पड़ते हैं और न ही लंबा इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यूनिट में 10 अत्याधुनिक हेमोडायलिसिस मशीनें स्थापित हैं, जो एक साथ कई मरीजों को उपचार देने में सक्षम हैं। मशीनों की बेहतर उपलब्धता के कारण मरीजों की लंबी प्रतीक्षा खत्म हुई है, जिससे गंभीर किडनी रोगियों को समय पर उपचार मिल रहा है।
10 महीनों में 8,712 बार डायलिसिस
जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच यूनिट ने 726 रोगियों को कुल 8,712 बार निशुल्क डायलिसिस प्रदान किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डायलिसिस जैसे महंगे इलाज को गरीब परिवार अक्सर पूरा नहीं कर पाते।
किडनी रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि एक मरीज को सप्ताह में 2–3 बार डायलिसिस की आवश्यकता होती है। यदि यह सुविधा मुफ्त न मिले तो एक परिवार के लिए हर महीने लगभग 25–30 हजार रुपये का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से यह निशुल्क यूनिट आगरा और आसपास के जिलों के रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
मरीजों को मिला उच्च गुणवत्ता वाला इलाज
यूनिट की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टरों व तकनीशियनों का कहना है कि यहां उपलब्ध मशीनें आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं और प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार समय निर्धारित किया जाता है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेंद्र कुमार अरोरा ने बताया “यूनिट मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित डायलिसिस प्रदान कर रही है। उन्हें अब न प्राइवेट अस्पतालों की फीस चुकानी पड़ती है, न उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।” उनके अनुसार, कई ऐसे मरीज हैं जिनका जीवन केवल इसलिए बच पाया क्योंकि उन्हें समय पर यह मुफ्त सुविधा उपलब्ध हो गई।
महंगा इलाज, गरीब परिवारों के लिए बड़ा संकट
किडनी फेल होने पर लगातार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। प्राइवेट अस्पतालों में एक बार की डायलिसिस का खर्च 1,200 से 2,000 रुपये तक आता है। गंभीर मरीजों को महीने में 10–12 बार डायलिसिस करानी पड़े तो खर्च 15,000 से 25,000 रुपये तक पहुंच जाता है।
ग़रीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खर्च अक्सर असहनीय साबित होता है। कई बार मरीज इलाज के अभाव में समय से पहले ही दम तोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल की निशुल्क यूनिट इन परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बन गई है।
यूनिट में उपचार पा चुके कई मरीजों ने बताया कि यदि यह सुविधा उपलब्ध न होती, तो शायद वे जीवित न बचते। उपचाररत मरीज राजकुमार ने कहा “मैं हर सप्ताह दो बार डायलिसिस कराता हूँ। प्राइवेट अस्पताल में खर्च इतना ज्यादा था कि परिवार टूटने लगा था। यहां मुफ्त इलाज मिल रहा है, इसलिए मेरी जिंदगी बची है।” इसी तरह एक अन्य महिला मरीज ने बताया कि पति दिहाड़ी मजदूर हैं और महंगा इलाज कराना संभव नहीं था। जिला अस्पताल की इस यूनिट ने उनका जीवन बचाया है।
सहज, सुव्यवस्थित और आधुनिक, यूनिट की खासियतें
10 आधुनिक डायलिसिस मशीनें
प्रशिक्षित मेडिकल तकनीशियन
चिकित्सकों की निगरानी
स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण
आपातकालीन सुविधा
मरीजों के लिए आरामदायक व्यवस्था
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बढ़ती मांग को देखते हुए यूनिट में और मशीनें जोड़ने की भी योजना है।
भारी आर्थिक बोझ से मिली छुटकारा, सरकार की पहल सफल
यूनिट का संचालन यूपी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों का हिस्सा है। योगी सरकार ने जन–जन तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने को प्राथमिकता दी है, और इसी के तहत PPP मॉडल पर मुफ्त डायलिसिस यूनिटें स्थापित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस मॉडल से सरकार और आमजन दोनों को फायदा हुआ है, क्योंकि बिना अतिरिक्त बोझ डाले लाखों गरीब मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधा मिल रही है।
आगरा के जिला अस्पताल की निशुल्क हेमोडायलिसिस यूनिट ने हजारों रोगियों को जीवनदान दिया है। आधुनिक तकनीक, मुफ्त उपचार और तेज सेवा के कारण यह यूनिट गरीब और जरूरतमंदों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। यह सिर्फ एक अस्पताल की पहल नहीं, बल्कि एक ऐसा मॉडल है जो स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाता है। कई मरीज, जिनके लिए डायलिसिस का खर्च असंभव था, आज उसी सुविधा के सहारे नई जिंदगी जी रहे हैं।






