सहकार भारती द्वारा सहकारिता सप्ताह का आयोजन, किसानों, महिलाओं और युवाओं को दिया संदेश

आगरा। सहकार भारती आगरा जनपद एवं महानगर इकाई द्वारा सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत ताजगंज स्थित एक होटल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस सहकारिता, कृषि प्रगति और आत्मनिर्भर भारत रहा। इसमें कई वरिष्ठ सहकारिता विशेषज्ञों, प्रदेश पदाधिकारियों एवं समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सहकारिता आंदोलन को नए आयाम देने के लिए अपने विचार साझा किए।

सहकारिता के केंद्र में महिला शक्ति
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रदेश सह-महिला प्रमुख करुणा नागर ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम सहकारिता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHGs) और महिला मंडलों ने गांवों में कृषि प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है।

करुणा नागर ने यह भी कहा कि सहकारिता द्वारा महिलाओं को किफायती ब्याज दर पर ऋण और वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह स्थानीय बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार “किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने का सशक्त मॉडल सहकारी प्रणाली ही है। यह न सिर्फ आर्थिक मजबूती देता है बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा भी देता है।”

सहकारिता से गांवों की शक्ति बढ़ेगी
कार्यक्रम में डॉ. मनीष कपूर ने सहकारी योजनाओं का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि आज भी कई किसान और आम लोग सरकारी सहकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में वंचित रह जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में सहकारी समितियाँ बड़ा बदलाव ला सकती हैं। सहकारिता से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि बाजार तक पहुंच भी सरल होती है। डॉ. कपूर ने कहा कि किसानों, महिलाओं और युवाओं तक सहकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

आधुनिक सहकारिता ही भविष्य
क्षेत्र मंत्री डॉ. रजनीश त्यागी ने कहा कि आने वाला समय कॉर्पोरेट–कॉपरेटिव मॉडल का होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहकारिता संस्थान यदि डिजिटल तकनीक, मार्केटिंग और आधुनिक प्रबंधन का उपयोग करें तो भारत का सहकारी मॉडल पूरी दुनिया में उदाहरण बन सकता है। उनके अनुसार “सहकारिता मॉडल भारत की आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करता है। स्थानीय संस्थान, स्थानीय उत्पाद और स्थानीय कौशल ही भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएँगे।”

कार्यक्रम में सहकारिता से जुड़ी बैंकिंग योजनाओं पर भी विशेष सत्र आयोजित हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि भूमि रहित किसानों से लेकर छोटे और मध्यम वर्ग के कृषकों तक, सभी को सहकारी बैंकों से सरल ऋण सहायता मिलती है। कृषि उपकरणों, खाद, बीज, पशुपालन और लघु उद्योगों के लिए विशेष सहकारी ऋण योजनाएँ लागू हैं। सहकारी बैंक ग्रामीण विकास का मुख्य स्तंभ हैं, जिन्हें अधिक सक्रिय करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि सहकार भारती के माध्यम से आवेदन करने वाले सभी पात्र किसानों को यह सभी सुविधाएँ आसानी से प्राप्त होंगी।

महानगर अध्यक्ष प्रो. रवींद्र शर्मा ने अपने वक्तव्य में भारत के प्राचीन सहकारी इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय संस्कृति की जड़ों में है और आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई सहकारी समितियों ने बीते वर्ष में 25% तक उत्पादन वृद्धि दर्ज की है। डेयरी से लेकर हस्तशिल्प तक, हर क्षेत्र में सहकारिता एक नेतृत्व मॉडल प्रस्तुत करती है। आत्मनिर्भर भारत में सहकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रो. शर्मा ने कहा कि यदि देशभर में सहकारी समितियों का विस्तार इसी गति से होता रहा तो भारत वैश्विक सहकारिता मानचित्र पर अग्रणी बन सकता है।

कृषि से उद्योग तक, सहकारिता का बढ़ता दायरा
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि सिर्फ खेती तक सीमित न रहते हुए सहकारिता मॉडल अब –
खाद्य प्रसंस्करण
डेयरी उद्योग
ग्रामीण पर्यटन
हस्तशिल्प
MSME क्षेत्र
डिजिटल मार्केटिंग
जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है। इससे गाँवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

सहकारिता मॉडल: भारत के भविष्य का आधार
सहकार भारती नेताओं ने कहा कि यदि सहकारिता को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का संगम मिल जाए तो भारत में गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में अभूतपूर्व परिवर्तन संभव है। डॉ. विवेक दुबे ने कहा कि सहकारिता भारत के लिए “सस्टेनेबल विकास मॉडल” है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को तेजी से पूरा कर सकता है।

विशेषज्ञों के विचारों से स्पष्ट है कि सहकारिता सिर्फ एक आर्थिक मॉडल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का स्थायी और समावेशी मार्ग है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि “जब समाज मिलकर आगे बढ़ता है, तभी सहकारिता की असली शक्ति उजागर होती है।”

इस दौरान महानगर उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, वरिष्ठ कार्यकर्ता जितेंद्र शर्मा, मंडल प्रभारी राजीव शर्मा, मीडिया प्रभारी विकास शर्मा, वरिष्ठ सदस्य अकरम खान, संदीप सिंह रघुवंशी, पूजा शर्मा और कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Samvad 24 Office
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